Ursala Hospital: पहले लिखो कि नहीं लिए गए पैसे, रोगियों-तीमारदारों से लिए जा रहे लिखित बयान, पढ़ें मामला
Kanpur News: कानपुर के उर्सला अस्पताल में ऑपरेशन से पहले मरीजों से जबरन यह लिखवाया जा रहा है कि उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया। तीमारदारों का आरोप है कि अवैध वसूली के बाद सबूत मिटाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है।
विस्तार
- केस-1: लोधर गांव निवासी श्याम लाल का पैर टूट गया था। उनका आरोप है कि इम्प्लांट लगाने के लिए अस्पताल वालों ने 10 हजार रुपये ले लिए। डॉक्टर व स्टाफ ने बताया कि आयुष्मान में आया इम्प्लांट उतना अच्छा नहीं होता। बार-बार बदलवाना पड़ेगा। इससे अच्छा है कि 15 हजार रुपये वाला इम्प्लांट लगवा लो। सिर्फ दस हजार रुपये देने पड़ेंगे। हमने दे भी दिए हैं। सर्जरी से पहले लिखवा भी लिया कि यहां रुपये नहीं पड़ते हैं। हमें इलाज कराना है तो मजबूरी में लिखकर देना पड़ा।
- केस-2: फर्रुखाबाद निवासी सुमन ने बताया कि उनके पति के पैर की सर्जरी हुई है। 15 हजार रुपये ले लिए और सर्जरी से पहले उन्हें लिखकर भी देना पड़ गया कि अस्पताल में उनसे रुपये नहीं लिए गए हैं।
कानपुुर में उर्सला अस्पताल में एक के बाद एक अव्यवस्थाएं और भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। आयुष्मान रोगियों से पैसे लेकर सर्जरी और उपकरण का मामला सामने आने के बाद अब मरीजों ने बताया कि सर्जरी से पहले पैसे न लेने का लिखित बयान लिया जा रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल के दौरान रोगियों ने बताया कि ऑपरेशन करवाने के चक्कर में पैसे भी देने पड़ते हैं और पैसे न लेने का लिखित बयान भी।
पेपर में लिखवाया, कोई पैसा नहीं पड़ा
तीमारदारों का कहना है कि सर्जरी करने के लिए जब रोगी को ओटी में लेकर जाते हैं, तो उससे पहले ही हमसे एक पेपर में लिखवा लिया था कि अस्पताल में इलाज के लिए हमसे कोई पैसा नहीं पड़ा है, जबकि पैसे हमसे लिए जा रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल जैसे यहां पैसे नहीं पड़ते और इलाज भी जरूरी होता है, इस कारण हम लोग चुपचाप लिख देते हैं।
निदेशक बोले- सारे रोगियों से ये नहीं लिखवाया जाता
उर्सला के निदेशक डॉ. बीसी पाल ने बताया कि अस्पताल में सारे रोगियों से ये नहीं लिखवाया जाता है। अगर कोई शिकायत आती है, तो उसमें जांच में पूछताछ के बाद अगर ये सामने आता है कि अस्पताल में रुपये नहीं लिए गए, तो रोगी को लिखकर देना होता है। अगर किसी रोगी से रुपये लिए गए हैं, तो वह मुझसे आकर संपर्क करे।