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Kanpur: यूजीसी के नए नियमों का अनूठा विरोध, वकील और किसानों ने मुंडवाया सिर, बोले- समाज का मौन रहना घातक
Thu, 29 Jan 2026 01:54 PM IST
हिमांशु अवस्थी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: हिमांशु अवस्थी
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:54 PM IST
सार
Kanpur News: नारामऊ कछार में अधिवक्ता और किसानों ने यूजीसी के नए नियमों को तानाशाही बताते हुए सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण समाज की चुप्पी पर दुख जताया और कानून को जातिवाद को बढ़ावा देने वाला करार दिया।
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यूजीसी नियमों के विरोध में वकील और किसानों ने मुंडवाया
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर में यूजीसी के नए नियमों को तानाशाही और जातिवाद को बढ़ावा देने वाला करार देते हुए नारामऊ कछार में सवर्ण समाज के लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। विरोध की आग इतनी तीव्र थी कि पेशे से अधिवक्ता अतुल त्रिवेदी और किसान भरत व सुशील शुक्ला ने सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवा लिया।
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सिर मुंडवाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने न केवल सरकार के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि सवर्ण समाज के उन रसूखदार लोगों पर भी निशाना साधा, जो इस कानून पर चुप्पी साधे हुए हैं। किसान भरत शुक्ला ने कहा कि यह कानून समाज को बांटने और जातिवाद की खाई को गहरा करने वाला है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर जिम्मेदार लोगों का मौन रहना बेहद चिंताजनक और दुखद है।
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अभी नौबर किया है, आगे तेहरवीं करेंगे
अधिवक्ता अतुल त्रिवेदी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आज हमने इस कानून के विरोध में सांकेतिक रूप से नौबर किया है। अगर इस तानाशाही कानून में सुधार नहीं किया गया, तो हम इसकी तेहरवीं करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह संघर्ष कानून की वापसी या संशोधन होने तक जारी रहेगा।