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कानपुर : नकली दवाओं का कारोबार करने वाला सरगना लखनऊ से गिरफ्तार
Thu, 24 Jun 2021 12:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Jun 2021 12:02 AM IST
सार
- क्राइम ब्रांच ने अमीनाबाद स्थित गोदाम से बरामद की थी दो करोड़ की नकली दवाइयां
- सरगना मनीष मिश्रा से पुलिस की पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे
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- फोटो : istock
विस्तार
नकली दवाओं का कारोबार करने वाले मनीष मिश्रा को बुधवार को क्राइम ब्रांच ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। मिश्रा लखनऊ की एलडीए कॉलोनी का निवासी है। टीम उसे साथ लेकर शहर पहुंच गई और पूछताछ शुरू कर दी।
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क्राइम ब्रांच ने सोमवार को गोविंद नगर पुलिस के साथ मिलकर दबौली टेंपो स्टैंड के पास से चकेरी निवासी पिंटू गुप्ता उर्फ गुड्डू व बेकनगंज निवासी आसिफ मोहम्मद खां उर्फ मुन्ना को भारी मात्रा में दवाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ में नकली दवाओं के बड़े स्तर पर किए जा रहे कारोबार का पता चला था।
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शातिरों की निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को लखनऊ के अमीनाबाद स्थित नकली दवाओं के गोदाम से करीब दो करोड़ रुपये की दवाएं बरामद कर सचिन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हालांकि, सरगना लखनऊ एलडीए कॉलोनी निवासी मनीष मिश्रा भाग निकला था। बुधवार को क्राइम ब्रांच के हाथ सफलता लग गई है। पुलिस उसे गिरफ्तार कर कानपुर के लिए रवाना हो चुकी है।
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दवाओं की पैकिंग करने वाले निशाने पर
ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाओं की बाजार में सप्लाई करने वाले गैंग के पकड़े जाने के बाद क्राइम ब्रांच दवा तस्करों को नकली स्ट्रिप व प्रिंटेड डिब्बे उपलब्ध कराने वालों को खोज रही है। पुलिस के अनुसार स्ट्रिप व डिब्बे पर प्रिंटिंग व स्कैनिंग कोड लगाने वालों का पता किया जा रहा है। क्योंकि ऐसी मशीनें 50 से 60 लाख में आती हैं।
कंपनियों के प्रतिनिधियों से मांगी गई जानकारी
एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर के अनुसार दवा तस्कर नकली दवाओं को पैक करने के लिए बिलकुल असली दिखने वाली स्ट्रिप और डिब्बों का इस्तेमाल करते थे। ऐसे में ब्रांडेड कंपनियों के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है। साथ ही ये कंपनियां जहां से अपने स्ट्रिप व डिब्बे बनवाते व छपवाते हैं, उनकी भी जानकारी मांगी गई है।
एसएमएस से पता चल जाता है दवा असली या नकली
एडीसीपी क्राइम के अनुसार है कुछ बड़ी दवा कंपनियां अपने ग्राहकों की सुविधा केलिए दवा केस्ट्रिप पर एक मोबाइन नंबर देती हैं। स्ट्रिप पर लिखे बैच नंबर को एसएमएस के माध्यम से दिए हुए नंबर पर भेजने पर कंपनी दवा के असली या नकली होने की जानकारी दे देती है। उन्होंने बताया कि यदि यह सुविधा सभी दवा कंपनियां देने लग जाएं तो ग्राहक नकली दवाओं को खरीदने से बच सकते हैं। इसके लिए कंपनियों के साथ ही मेडिकल स्टोर संचालकों को भी अपने ग्राहकों को जागरूक करना चाहिए।