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Kanpur: कर अधिवक्ताओं ने जीएसटी के प्रमुख सचिव के खिलाफ खोला मोर्चा

Mon, 17 Feb 2025 07:00 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 17 Feb 2025 07:00 PM IST
सार

निष्पक्ष न्याय अभियान समिति ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप खत्म करने की मांग उठाई है। कहा कि हस्तक्षेप खत्म न होने पर आंदाेलनकिया जाएगा। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।

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Kanpur: Tax advocates opened front against the Principal Secretary of GST
दि उत्तर प्रदेश टैक्स बार एसोसिएशन ने की पत्रकार वार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दि उत्तर प्रदेश टैक्स बार एसोसिएशन की निष्पक्ष न्याय अभियान समिति की ओर से लखनऊ स्थित होटल में पत्रकार वार्ता की गई। इसमें कानपुर के कर अधिवक्ता भी शामिल हुए। इसमें जीएसटी के प्रमुख सचिव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यायिक प्रकिया में हस्तक्षेप न करने की मांग उठाई। कहा कि हस्तक्षेप खत्म न हुआ तो पूरे प्रदेश के कर अधिवक्ता सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी जायसवाल, महासचिव देवेंद्र शर्मा और वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रमुख सचिव की कार्यशैली से विभाग को 2000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। कर अपीलों के दैनिक निस्तारण की संख्या पांच से बढ़ाकर 50 करने का अव्यवहारिक आदेश दिया है। अपीलों की सुनवाई एकतरफा हो रही हैं। विभाग के अपीलीय और न्यायिक अधिकारियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रत्यक्ष निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अपीलीय अधिकारियों को निर्देशित करना न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है।
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कर विभाग के पक्ष में निर्णय लेने के लिए प्रत्यक्ष दबाव डाला जा रहा है। बिना नोटिस के टैक्स वसूली के नाम पर करदाता के बैंक खाते से रुपये निकाले जा रहे हैं। पहली बार कर न्यायिक अधिकरण के सदस्य को प्रयागराज में अपर आयुक्त ग्रेड-एक का प्रशासनिक कार्यभार दिया गया है, जो न्यायपालिका और कार्यपालिका का उल्लंघन है। बताया कि सात फरवरी को मौखिक निर्देश दिए गए कि साल 2020-21 के जीएसटी अधिनियम के तहत धारा 73 के आदेशों की प्रक्रिया 10 फरवरी तक पूरी की जाए, जबकि इसकी अंतिम तिथि 28 फरवरी है। यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी 7 अगस्त 2023 को प्रमुख सचिव के खिलाफ टिप्पणी की थी। यहां पर सौरभ सिंह गहलोत, आनंद सिंघल, सुशील मौर्य, प्रदीप पराशर, शूरसेन सिंह, रविशंकर राजपूत, अरुण प्रकाश मिश्रा, पीयूष सिंह गहलोत, सुमित कुमार वर्मा, विजय बहादुर श्रीवास्तव, महेश सक्सेना आदि थे।
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