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कटे हाथ का मामला: प्राचार्य- हमें मिली जांच तो इलाज होगा प्रभावित, दो लाख से ज्यादा स्लाइड बनाने की चुनौती

Sun, 07 Jun 2026 01:31 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 07 Jun 2026 01:31 PM IST
सार

Kanpur News: आईटीबीपी जवान की मां के कटे हाथ की फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच को लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने असमर्थता जताई है। मेडिकल प्रशासन का सुझाव है कि इसके लिए किसी विशेषज्ञ संस्थान की मदद ली जाए।

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Kanpur severed hand case  Principal says treatment will be affected if inquiry is initiated
आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने का मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के कटे हाथ की जांच को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन संशकित है। प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए दो लाख से ज्यादा स्लाइड बनाने की चुनौती होगी। इसके लिए अत्यधिक समय और अतिरिक्त संसाधन की आवश्यकता होगी। इस कारण अन्य मरीजों की जांच प्रभावित हो सकती है।

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खागा (फतेहपुर) की निर्मला देवी को 13 मई को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। विकास का आरोप है कि इलाज में लापरवाही और मां के एक हाथ में ज्यादा सूजन आने के बाद वह उन्हें पारस अस्पताल ले गए। 17 मई को उनकी मां का हाथ काट दिया गया। वह मां का कटा हाथ आइस बॉक्स में लेकर चार दिन रेलबाजार थाना पुलिस कमिश्नर कार्यालय और सीएमओ दफ्तर के चक्कर लगाते रहे।

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कटे हाथ को कब्जे में लेकर फॉर्मेलिन में रखवाया
इसके बाद रेलबाजार पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कटे हाथ को कब्जे में लेकर फॉर्मेलिन में रखवाया। रेलबाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक अमान सिंह ने 28 मई को जांच के लिए कटा हाथ पैक कर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग को सौंपा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इस मामले में जांच कमेटी गठित करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा पर कमेटी गठित नहीं हुई।

मेडिकल कॉलेज के दो कर्मियों से अभद्रता की
इस पर उन्होंने पांच जून को कटा हाथ रेलबाजार पुलिस को लौटाने के लिए थाने भेजा। उनका आरोप है कि पुलिस ने उसे वापस नहीं लिया और मेडिकल कॉलेज के दो कर्मियों से अभद्रता की। शुक्रवार को रेलबाजार पुलिस द्वारा मेडिकल कॉलेज के कर्मियों से अभद्रता का मामला शासन तक पहुंचा। शासन ने हस्तक्षेप किया तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने थानाध्यक्ष रेलबाजार के नाम से पत्र के साथ कटा हाथ थाने भेजा।

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जिलाधिकारी को कमेटी गठित करनी होगी
पुलिस ने उसे रिसीव किया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कटे हुए हाथ की फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जांच से पता चलेगा कि किस परिस्थिति में हाथ कटा है। मेडिकल कॉलेज से हिस्टोपैथोलॉजी जांच कराने के लिए जिलाधिकारी को कमेटी गठित करनी होगी।

समय पर जांच कर भी रिपोर्ट सौंप दी है
सीएमओ जांच के लिए प्राइमरी फॉर्म भरकर भेजेंगे। कमेटी और विकास सिंह की मौजूदगी में सील खोलकर कटा हाथ जांच के लिए निकाला जाएगा। वहीं, इस संबंध में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि हमने गाइडलाइन के मुताबिक काम किया है। समय पर जांच कर भी रिपोर्ट सौंप दी है।

सीएमओ ने कहा- कोई कमेंट नहीं करना चाहता
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि इस मामले में हम कुछ नहीं कहना चाहते हैं। हमारी ओर से हाथ की जांच कर रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। इसके आगे मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहता हूं। रेलबाजार इंस्पेक्टर अमान सिंह ने कहा कि इस मामले में उच्च अधिकारियों से बात करें।

किसी अन्य मेडिकल इंस्टीट्यूट से संपर्क किया जाना चाहिए
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में हिस्टोपैथोलॉजी जांच की मांग ने दो लाख से ज्यादा स्लाइड बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है। इस प्रक्रिया में लगने वाले अत्यधिक समय और अतिरिक्त संसाधनों के कारण विभाग की नियमित मरीजों की जांच सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

विशिष्ट हिस्से से मांस के टुकड़े जांच के लिए लिए जाएंगे
इसके अतिरिक्त यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि हाथ के किस विशिष्ट हिस्से से मांस के टुकड़े जांच के लिए लिए जाएंगे। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि हमारे कॉलेज को हिस्टोपैथोलॉजी की जांच की विशेषज्ञता नहीं है। इसलिए सुझाव यही है कि इस तरह की जांच के लिए लखनऊ या किसी अन्य ऐसे मेडिकल इंस्टीट्यूट से संपर्क किया जाना चाहिए, जहां फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच की विशेषज्ञता हो।

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