{"_id":"5ee4cffb7251c46cf010ba04","slug":"kanpur-s-vinod-dubey-journey-from-clay-to-music","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कानपुर के विनोद का मिट्टी से म्यूजिक तक का सफर, गुलाबो-सिताबो में गाया 'क्या लेकर आए हो जग में' गाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर के विनोद का मिट्टी से म्यूजिक तक का सफर, गुलाबो-सिताबो में गाया 'क्या लेकर आए हो जग में' गाना
Sat, 13 Jun 2020 06:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
ऐश्वर्या द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
ऐश्वर्या द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 13 Jun 2020 06:40 PM IST
विज्ञापन
विनोद दुबे
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माधव ने दिया मुझे माया को, माया ने दिया मुझे मां को, मां ने दिया मुझे मिट्टी को, मिट्टी ने दिया मुझे म्यूजिक को, म्यूजिक से ज्ञान में जाकर वापस माधव में मिल जाना है। संगीत से अपने इस प्रेम को इन लाइनों के माध्यम से आर्टिस्ट विनोद दुबे ने समझाने की कोशिश की है।
फिल्म गुलाबो-सिताबो में विनोद का लिखा और गाया गाना क्या लेकर आए हो जग में; खूब धूम मचा रहा है। विनोद ने क्राइस्ट चर्च कॉलेज से पढ़ाई पूरी की है और अब मुंबई में रहते हैं। समय मिलता है तो हूलागंज स्थित अपने पैतृक घर में अपने चाचा से मिलने आते रहते हैं। विनोद मिट्टी की कलाकृति बनाने के लिए मशहूर हैं। पोटरी गुरु के नाम से जाने जाते हैं।
विज्ञापन
फिल्म गुलाबो-सिताबो में विनोद का लिखा और गाया गाना क्या लेकर आए हो जग में; खूब धूम मचा रहा है। विनोद ने क्राइस्ट चर्च कॉलेज से पढ़ाई पूरी की है और अब मुंबई में रहते हैं। समय मिलता है तो हूलागंज स्थित अपने पैतृक घर में अपने चाचा से मिलने आते रहते हैं। विनोद मिट्टी की कलाकृति बनाने के लिए मशहूर हैं। पोटरी गुरु के नाम से जाने जाते हैं।
विज्ञापन
विनोद दुबे
- फोटो : amar ujala
ऐसे मिला बड़ा ब्रेक
विनोद बताते हैं कि जब वह छात्रों को मिट्टी से खिलौने व मूर्ति बनाना सिखाते थे तो उसी समय टेबल बजाकर लोकगीत भी गुनगुनाया करते थे। उनकी एक छात्रा प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर शांतनु मोइत्रा की पत्नी हैं। शांतनु से उनके द्वारा ही मुलाकात हुई जो एक लोक गायक की खोज कर रहे थे।
विनोद ने अपना लिखा हुआ गीत उन्हें सुनाया तो वे प्रभावित हुए। कुछ दिन बाद उन्होंने रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो बुला लिया। इस गाने को गुलाबो सिताबो में जगह मिल गई। अब उनको कई बड़े प्रोजेक्ट के ऑफर आए हैं।
बचपन से रहा लिखने का शौक
विनोद ने बताया कि उनका गांव उन्नाव है जहां पर वह बचपन में अपने दादा के साथ रामायण पढ़ा करते थे। बचपन से ही लिखने का शौक रहा जो समय के साथ बढ़ता चला गया। पिता शिव प्रकाश दुबे, गिरीश कर्नाड की 'उत्सव' व गोविंद निहलानी की 'तमस' जैसी फिल्मों में चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर रहे हैं। ओमपुरी तथा कुलभूषण खरबंदा के सेक्रेटरी भी रहे। विनोद ने कहा कि महामारी खत्म होने के बाद वह कानपुर आएंगे और लाइव परफॉर्मेंस देंगे।
विनोद बताते हैं कि जब वह छात्रों को मिट्टी से खिलौने व मूर्ति बनाना सिखाते थे तो उसी समय टेबल बजाकर लोकगीत भी गुनगुनाया करते थे। उनकी एक छात्रा प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर शांतनु मोइत्रा की पत्नी हैं। शांतनु से उनके द्वारा ही मुलाकात हुई जो एक लोक गायक की खोज कर रहे थे।
विनोद ने अपना लिखा हुआ गीत उन्हें सुनाया तो वे प्रभावित हुए। कुछ दिन बाद उन्होंने रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो बुला लिया। इस गाने को गुलाबो सिताबो में जगह मिल गई। अब उनको कई बड़े प्रोजेक्ट के ऑफर आए हैं।
बचपन से रहा लिखने का शौक
विनोद ने बताया कि उनका गांव उन्नाव है जहां पर वह बचपन में अपने दादा के साथ रामायण पढ़ा करते थे। बचपन से ही लिखने का शौक रहा जो समय के साथ बढ़ता चला गया। पिता शिव प्रकाश दुबे, गिरीश कर्नाड की 'उत्सव' व गोविंद निहलानी की 'तमस' जैसी फिल्मों में चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर रहे हैं। ओमपुरी तथा कुलभूषण खरबंदा के सेक्रेटरी भी रहे। विनोद ने कहा कि महामारी खत्म होने के बाद वह कानपुर आएंगे और लाइव परफॉर्मेंस देंगे।