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कानपुर: CIB सुविधा से 89 खातों में भेजे 2.41 करोड़, पोर्टल पर 38 शिकायतें दर्ज, पुलिस बोली- रकम न कड़ी तो टूटी

Sat, 17 Oct 2026 09:13 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 17 Oct 2026 09:13 AM IST
सार

Kanpur News: जाजमऊ निवासी चमड़ा कारोबारी से साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने आरोपी अखिल सिंह चौहान और सतेंद्र यादव उर्फ टोनी को गिरफ्तार किया है। आरोपी अखिल ने फर्जी फर्में बनाकर चकेरी स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से कॉरपोरेट इंटरनेट बैंकिंग सुविधा हासिल की थी, जिसके जरिए उसने ठगी के 2.41 करोड़ रुपये एक साथ 89 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

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Kanpur Rs 2.41 crore transferred to 89 accounts via CIB facility 38 complaints registered on the portal
साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में जाजमऊ के चमड़ा कारोबारी मो. अहमद लारी के साथ छह अक्तूबर को हुई 2.66 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा पुलिस ने शुक्रवार को किया। सीपी रघुबीर लाल ने बताया कि मामले में चकेरी निवासी अखिल सिंह चौहान और सतेंद्र यादव उर्फ टोनी को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी अखिल ने न सिर्फ लारी से निवेश के नाम पर रकम वसूली बल्कि फर्म दिखाकर चकेरी की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से बड़ी कंपनियों को दी जाने वाली सीआईबी (कॉरपोरेट इंटरनेट बैंकिंग) सुविधा भी ले रखी थी।

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इस सुविधा के माध्यम से ठगी की रकम को एक साथ 89 खातों में ट्रांसफर किया गया। आरोपी के बैंक खाते में पुलिस को सिर्फ 25 लाख रुपये ही मिले। अखिल बीसीए किए हुए है और उसने कई फर्जी फर्म बना रखी हैं। मुंबई में बैठे कैली व विवेक रॉय के साथ मिलकर अखिल एपीके फाइल, डिजिटल अरेस्ट व निवेश के नाम पर लोगों से साइबर ठगी कर रहा था। पुलिस कैली का पता लगा रही है।

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निवेश में लाभ का झांसा देकर बनाते थे शिकार
वादी लारी ने पुलिस को बताया था कि फिनसोल प्राइवेट लिमिटेड फर्म में निवेश करने पर उन्हें बड़े मुनाफे का लालच दिया गया। उन्होंने 2.66 करोड़ निवेश किए थे। मुनाफा मिलना तो दूर पूरी रकम डूबने की बात पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अखिल और टोनी शातिर हैं। उन्होंने हैवी मोटर ड्राइविंग स्कूल व सद्भावना सॉल्यूशन प्रा. लि. आदि फर्जी फर्में खोल रखी हैं। इनके माध्यम से लोगों को निवेश में लाभ का झांसा देकर साइबर ठगी का शिकार बनाते थे।

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बैंक मैनेजर की सख्ती के चलते मंसूबे पूरे न हो सके
अखिल ने चकेरी की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से सीआईबी सुविधा ले रखी थी। इसी के माध्यम से तीन और पांच अगस्त को 3.24 करो़ड़ रुपये का ट्रांजेक्शन भी किया। अखिल और टोनी ने चकेरी की एक और बैंक जैना से भी सीआईबी सुविधा लेने का प्रयास किया। इसके लिए मस्टर्ड ऑयल पतंजलि नाम की फर्जी फर्म के नाम डेढ़ करोड़ का ऑर्डर दिखाने का प्रयास किया, लेकिन बैंक मैनेजर की सख्ती के चलते उसके मंसूबे पूरे न हो सके। इसके बाद अखिल ने मैनेजर को भी काफी परेशान किया था।

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31 खातों के खिलाफ पोर्टल पर 38 शिकायतें दर्ज
सीपी ने बताया कि जांच में अखिल के कुल 31 बैंक खाते सामने आए हैं। इनके खिलाफ उड़ीसा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा व उत्तराखंड आदि राज्यों से करीब 38 शिकायतें और सात एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि साइबर ठगी की रकम को लेकर अखिल का अपने ही साथियों से लेनदेन का विवाद भी हुआ था। इसकी शिकायत एक बार अखिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी।

पुलिस बोली- रकम न सही कड़ी तो टूटी
हर बार की तरह इस बार भी साइबर ठगी के खुलासे में आंकड़ों में लाखों-करोड़ों की रकम तो सामने आई लेकिन न तो पकड़े गए आरोपियों की हैसियत ही लाखों-करोड़ों की निकली और न ही कोई मास्टर माइंड सामने आया। इस पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगी की रकम मिलना या मास्टर माइंड का पकड़ा जाना इतना जरूरी नहीं है जितना ठगी की कड़ी टूटना आवश्यक है। रही बात मास्टर माइंड की, तो हर बार की तरह पुलिस से टीमें लगी हैं का ही जवाब मिला।

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