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Kanpur: लॉकर गायब करने में फंसेगी पीएनबी के अफसरों की गर्दन, पढ़ें पूरी खबर

Wed, 19 Apr 2023 12:47 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 19 Apr 2023 12:47 PM IST
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Kanpur: PNB officers will be trapped in missing locker
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

बहुचर्चित लॉकर प्रकरण में अब पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों की गर्दन फंसने लगी है। नौबस्ता में दर्ज मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच उन अफसरों की सूची बना रही है जिनके समय में लॉकर किदवईनगर शाखा से जागेश्वर शाखा व अन्य जगह स्थानांतरित किए गए थे। इन अफसरों से जांच अधिकारी लगातार शिफ्टिंग से जुड़े सभी दस्तावेज मांग रहे हैं लेकिन अब तक यह उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

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ऐसे में उक्त अफसरों की गर्दन फंसनी तय मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार बैंक ने अभी तक जो दस्तावेज दिए हैं उनसे यह साफ नहीं हो सका है कि किदवईनगर शाखा से लॉकर हटाने के दौरान कितने लॉकर कहां भेजे गए और किसके आदेश पर भेजे गए। चूंकि जागेश्वर शाखा से मिले जवाब में यह साफ हो गया है कि शिफ्टिंग के समय कई ऐसे लॉकर थे जिनकी मास्टर की तो साथ में आई थी लेकिन कस्टमर की यानि दूसरी चाभी मौजूद नहीं थी।

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ऐसे में माना जा रहा है कि यह सभी लॉकर बंद थे और इनमें सामान रखा हुआ था। दूसरा, बैंक यह नहीं बता पा रहा है कि शिफ्टिंग से पहले उसने लॉकर धारकों को पत्र लिखकर उसे खाली करने या शिफ्ट करने से संबंधित कोई जानकारी दी थी या नहीं। चूंकि आरबीआई का स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत ही यह काम होता है जिसमें लॉकर खाली होने पर ही शिफ्ट किया जाता है।

ऐसे में अगर चाभियां नहीं थी तो यह माना जा सकता है कि बैंक ने भरे हुए लॉकर ही शिफ्ट कर दिए। साथ ही जिन लॉकरों का पता नहीं चल रहा उनमें रखे सामान के गायब होने पर भी बैंक की ही जिम्मेदारी बनेगी। इन्हीं तर्कों के साथ अब जांच अधिकारियों ने बैंक अफसरों को घेरने के लिए कमर कस ली है। माना जा रहा है कि अगर बैंक अफसरों की ओर से वाजिब जवाब नहीं मिलते हैं तो क्राइम ब्रांच उनकी गिरफ्तारी भी कर सकती है।

इस मामले में फंसा है पेंच
नौबस्ता निवासी वायुसेना से रिटायर रमेश चंद्र तिवारी ने 2007 में पीएनबी की किदवईनगर स्थित के ब्लॉक शाखा में एक लॉकर लिया था जिसमें पत्नी व बच्चों के करीब 25 लाख रुपये के जेवर रखे हुए थे। आखिरी बार उन्होंने अपने पास मौजूद चाभी से 26 दिसंबर 2013 को लॉकर खोला था। इसके बाद जब वह 3 मार्च 2018 को लाॅकर संचालित करने गए तो पता चला कि वह कहीं और शिफ्ट हो चुका है। लंबे पत्राचार के बाद भी जब लॉकर और सामान का पता नहीं चला तो उन्होंने नौबस्ता थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। हाल ही में वादी की गुजारिश पर पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच नौबस्ता से क्राइम ब्रांच को दे दी है।

 
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