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कानपुर: त्योहार का रस, ट्रेनें फुल, यात्री ‘बे’बस, ट्रेनों के आरक्षित कोच में जनरल टिकट लेकर चढ़े यात्री
Thu, 04 Nov 2021 02:03 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 04 Nov 2021 02:03 PM IST
सार
झकरकटी बस अड्डे पर सबसे ज्यादा यात्री रायबरेली, प्रतापगढ़, हरदोई रूट के रहे। इन रूटों पर बसों के अतिरिक्त फेरे और रिजर्व बसों के संचालन के बाद भी भीड़ रही।
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यात्रियों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिवाली में घर जाने वालों को बड़ी मुश्किल से ट्रेनों और बसों में जगह मिल रही है। अनारक्षित श्रेणी की ट्रेनों में तो यात्रियों को बैठने की जगह नहीं मिली। एक्सप्रेस, मेल ट्रेनों के सेकेंड स्लीपर यानी आरक्षित श्रेणी वाले जनरल कोचों में भी यात्री चढ़ गए।
आम तौर पर इन कोचों में यात्रा के लिए रिजर्वेशन कराना होता है, लेकिन भीड़ की वजह से यात्री जनरल टिकट लेकर चढ़ गए। झकरकटी बस अड्डे पर भी मारामारी रही। अतिरिक्त बसों के चलने के बावजूद यात्रियों को खड़े होकर जाना पड़ा। गुरुवार दोपहर तक ऐसी ही भीड़भाड़ रहेगी।
हरदोई, रायबरेली और पूर्वांचल के यात्री ज्यादा
झकरकटी बस अड्डे पर सबसे ज्यादा यात्री रायबरेली, प्रतापगढ़, हरदोई रूट के रहे। इन रूटों पर बसों के अतिरिक्त फेरे और रिजर्व बसों के संचालन के बाद भी भीड़ रही। यहां यात्री ज्यादा थे और बसें कम। कंट्रोल रूम से भी सबसे ज्यादा इसी रूट के यात्रियों को संबंधित प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए एनाउंसमेंट होता रहा।
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आम तौर पर इन कोचों में यात्रा के लिए रिजर्वेशन कराना होता है, लेकिन भीड़ की वजह से यात्री जनरल टिकट लेकर चढ़ गए। झकरकटी बस अड्डे पर भी मारामारी रही। अतिरिक्त बसों के चलने के बावजूद यात्रियों को खड़े होकर जाना पड़ा। गुरुवार दोपहर तक ऐसी ही भीड़भाड़ रहेगी।
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हरदोई, रायबरेली और पूर्वांचल के यात्री ज्यादा
झकरकटी बस अड्डे पर सबसे ज्यादा यात्री रायबरेली, प्रतापगढ़, हरदोई रूट के रहे। इन रूटों पर बसों के अतिरिक्त फेरे और रिजर्व बसों के संचालन के बाद भी भीड़ रही। यहां यात्री ज्यादा थे और बसें कम। कंट्रोल रूम से भी सबसे ज्यादा इसी रूट के यात्रियों को संबंधित प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए एनाउंसमेंट होता रहा।
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इसके अलावा गोरखपुर, देवरिया, प्रयागराज, जौनपुर, सुल्तानपुर, वाराणसी, फैजाबाद, बहराइच, सिद्धार्थ नगर के यात्री सबसे ज्यादा रहे। यहां की सीधी बसें कम होने की वजह से यात्रियों ने लखनऊ की बस पकड़ी। बुंदेलखंड के बांदा, हमीरपुर, महोबा के भी यात्री थे।
बसों से घरों जाने वाले ज्यादातर यात्रियों में श्रमिक, कामगार वर्ग का तबका रहा, जो परिवार के साथ घर जा रहे थे। झकरकटी बस अड्डा के एआरएम राजेश सिंह ने बताया कि कोरोना काल के पहले जिस तरह से दिवाली के एक दिन पहले भीड़ होती थी, उसकी तुलना में इस बार पैसेंजर लोड 60 प्रतिशत ही रहा। फिलहाल जो बसें थीं, उनमें यात्री भरकर गए। अभी वह नौबत नहीं आई कि किसी को बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा हो।
बसों से घरों जाने वाले ज्यादातर यात्रियों में श्रमिक, कामगार वर्ग का तबका रहा, जो परिवार के साथ घर जा रहे थे। झकरकटी बस अड्डा के एआरएम राजेश सिंह ने बताया कि कोरोना काल के पहले जिस तरह से दिवाली के एक दिन पहले भीड़ होती थी, उसकी तुलना में इस बार पैसेंजर लोड 60 प्रतिशत ही रहा। फिलहाल जो बसें थीं, उनमें यात्री भरकर गए। अभी वह नौबत नहीं आई कि किसी को बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा हो।
आरक्षित और अनारक्षित श्रेणी की ट्रेनों में चढ़ गए यात्री
परिवार के साथ घर पहुंचने की जल्दबाजी और उत्सुकता की वजह से रेल यात्री हर श्रेणी की ट्रेनों में जनरल कोच का टिकट लेकर चढ़ गए। कानपुर-प्रतापगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस, झांसी और आगरा इंटरसिटी एक्सप्रेस, लखनऊ-कानपुर मेमू, प्रयागराज संगम-कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, चित्रकूट इंटरसिटी एक्सप्रेस, जबलपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में तो भीड़ थी।
मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में तो यात्री जनरल कोच का टिकट लेकर चढ़ गए। भीड़ इतनी थी कि टीटीई ने भी यात्रियों का सिर्फ टिकट चेक किया। कुछ ट्रेनों में चेकिंग भी नहीं हो सकी। पूर्वांचल जाने वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों के रिजर्व कोच में जनरल श्रेणी का टिकट खरीदकर यात्री चढ़े।
परिवार के साथ घर पहुंचने की जल्दबाजी और उत्सुकता की वजह से रेल यात्री हर श्रेणी की ट्रेनों में जनरल कोच का टिकट लेकर चढ़ गए। कानपुर-प्रतापगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस, झांसी और आगरा इंटरसिटी एक्सप्रेस, लखनऊ-कानपुर मेमू, प्रयागराज संगम-कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, चित्रकूट इंटरसिटी एक्सप्रेस, जबलपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में तो भीड़ थी।
मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में तो यात्री जनरल कोच का टिकट लेकर चढ़ गए। भीड़ इतनी थी कि टीटीई ने भी यात्रियों का सिर्फ टिकट चेक किया। कुछ ट्रेनों में चेकिंग भी नहीं हो सकी। पूर्वांचल जाने वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों के रिजर्व कोच में जनरल श्रेणी का टिकट खरीदकर यात्री चढ़े।