भुगतान संकट: MSME के खाते हो सकते हैं एनपीए, एक महीने से बंदरगाहों पर फंसे कंटेनर, निर्यातकों की बढ़ी धड़कनें
Kanpur News: अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के कारण कानपुर की करीब 1000 MSME इकाइयों का निर्यात भुगतान फंस गया है। 45 दिनों में पैसा न आने पर बैंक खाते एनपीए होने और फ्रीज होने का खतरा मंडरा रहा है।
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अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कानपुर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के बैंक खातों पर नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध के कारण औद्योगिक उत्पादन में संकट और कच्चे माल व ईंधन की कमी जैसी चुनौतियां पहले से ही थीं। अब निर्यात की गई खेप के भुगतान में देरी से यह नई समस्या उत्पन्न हो गई है।
शहर में करीब 800 से एक हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयों के सामने ऐसी स्थिति जल्द देखने को मिल सकती है। उद्योग संगठन सरकार से भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की ओर से निर्यात किए गए माल का भुगतान 45 दिनों के भीतर होना अनिवार्य है। इस अवधि में भुगतान न होने पर बैंक खाते को एनपीए घोषित कर देते हैं। एनपीए होने पर बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जिससे सभी लेनदेन रुक जाते हैं।
इकाइयों के खाते फ्रीज होने का खतरा
शहर की कई निर्यात इकाइयों ने विभिन्न देशों को अपनी खेप भेजी थी। यह खेप युद्ध के कारण संबंधित खरीदारों तक नहीं पहुंच पाई है। बड़ी संख्या में इकाइयों का माल अभी भी समुद्री रास्तों में फंसा हुआ है। इस स्थिति के कारण निर्यातक साख पत्र (लेटर ऑफ क्रेडिट) का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। साख पत्र का उपयोग न होने से भुगतान नहीं हो रहा है। इससे बैंक इन इकाइयों के खाते फ्रीज होने का खतरा बन गया है।
70 से 80 फीसदी एमएसएमई बैंक के कर्ज पर निर्भर
लघु उद्योग भारती कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष संदीप अवस्थी ने बताया कि युद्ध से एमएसएमई इकाइयों के सामने नया संकट आ गया है। अवस्थी ने बताया कि निर्यात किया गया माल अभी भी समुद्र में या बंदरगाहों पर फंसा है। कई इकाइयों का तैयार माल डंप है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से विदेशी खरीदारों को कंसाइनमेंट नहीं मिले हैं, जिससे भुगतान रुका है। उन्होंने सरकार से राहत और भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की मांग की। शहर की 70 से 80 फीसदी एमएसएमई बैंक के कर्ज पर निर्भर हैं।