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UP: मर्चेंट नेवी अफसर का शव 18 दिन बाद घर पहुंचा, बेसुध हुई पत्नी,रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान गई थी जान
Wed, 05 Aug 2026 07:19 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:19 PM IST
सार
Kanpur News: 18 जुलाई को रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ब्लैक सी में शिप पर हुए हमले में जान गई थी।
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बेसुध हुए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान काला सागर से गुजर रहे कार्गो शिप पर हुए हमले में जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ अफसर सागर गुप्ता का शव बुधवार को शास्त्रीनगर स्थित घर पहुंचा तो परिजन में कोहराम मच गया। पत्नी शव देख बेसुध हो गईं। परिजन ने शव को तिरंगे झंडे से न लपेट कर लाने पर नाराजगी जताई और खुद झंडा ओढ़ा कर सलामी दी। परिवार ने दो करोड़ रुपये मुआवजा, घर के एक सदस्य को नौकरी और शहीद का दर्जा देने की मांग की। वहीं, सागर के घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। शव का आज भैरो घाट पर अंतिम संस्कार किया जा सकता है।
शास्त्रीनगर ऊंचा पार्क निवासी सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। परिवार में मां रमादेवी, पत्नी शालू, आठ माह का बेटा कृष्णा और पांच साल की बेटी गौरी के अलावा बड़े भाई मनीष, भाभी ज्योति और दो भतीजे हैं। 18 जुलाई को यूक्रेन के ड्रोन हमले में शिप में आग लगने से सागर की मौत हो गई थी। परिजन शव घर लाने के लिए लगातार प्रयासरत थे।
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शास्त्रीनगर ऊंचा पार्क निवासी सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। परिवार में मां रमादेवी, पत्नी शालू, आठ माह का बेटा कृष्णा और पांच साल की बेटी गौरी के अलावा बड़े भाई मनीष, भाभी ज्योति और दो भतीजे हैं। 18 जुलाई को यूक्रेन के ड्रोन हमले में शिप में आग लगने से सागर की मौत हो गई थी। परिजन शव घर लाने के लिए लगातार प्रयासरत थे।
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बेसुध हुए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार सुबह 7:30 बजे रूस की राजधानी मास्को से एयर एंबुलेंस से सागर का पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा जहां बड़े भाई दीपक व सागर के साले शोभित ने शव को रिसीव किया। एंबुलेंस के माध्यम से शाम चार बजे शव घर लेकर पहुंचे। सागर के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए पड़ोसियों, मित्रों समेत सैकड़ों की भीड़ जमा थी।
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बेसुध हुए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
चाचा ने आठ को बचाकर जान गंवाई, झंडा से तो ढक देते
भतीजी खुशी शव को तिरंगे झंडे से लिपटा न देख चीखने-चिल्लाने लगी। कहा कि मेरे चाचा ने आठ लोगों की जान बचाई। कम से कम शव को झंडे से तो ढक देते...। भाई के साथ खुशी बाजार गई और झंडा खरीद कर लाई। इसे परिजन ने शव को ओढ़ाकर सलामी दी। सूचना पर तहसीलदार अनुभव कुमार द्विवेदी मौके पर पहुंचे और मांग पत्र लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मांग जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। वहीं, बुधवार को शव आने की सूचना पर सपा नेता सम्राट विकास, विनय गुप्ता, और पूर्व पार्षद राघवेंद्र ने घर पहुंच कर हर संभव मदद का भरोसा दिया।
भतीजी खुशी शव को तिरंगे झंडे से लिपटा न देख चीखने-चिल्लाने लगी। कहा कि मेरे चाचा ने आठ लोगों की जान बचाई। कम से कम शव को झंडे से तो ढक देते...। भाई के साथ खुशी बाजार गई और झंडा खरीद कर लाई। इसे परिजन ने शव को ओढ़ाकर सलामी दी। सूचना पर तहसीलदार अनुभव कुमार द्विवेदी मौके पर पहुंचे और मांग पत्र लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मांग जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। वहीं, बुधवार को शव आने की सूचना पर सपा नेता सम्राट विकास, विनय गुप्ता, और पूर्व पार्षद राघवेंद्र ने घर पहुंच कर हर संभव मदद का भरोसा दिया।