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कानपुर: कार्यकारिणी की बैठक में वकील लेकर आईं महापौर, नगर आयुक्त बोले- बाहरी को जवाब देने के लिए नहीं बैठा हूं

Wed, 28 Oct 2026 11:45 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Wed, 28 Oct 2026 11:45 PM IST
सार

कार्यकारिणी की बैठक महापौर वकील लेकर पहुंची। जिसका नगर आयुक्त ने बहिष्कार किया। महापौर ने कहा कि अब चुप नहीं बैठूंगी, शासन तक मामला ले जाऊंगी। 

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Kanpur: Mayor brings a lawyer to an executive committee meeting
कार्यकारिणी की बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में बुधवार को महापौर प्रमिला पांडेय ने विधिक राय लेने का हवाला देकर दो अधिवक्ता साथ बैठा लिए। इस पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बिफर पड़े। कहा कि बाहरी को जवाब देने के लिए नहीं बैठा हूं। वह अपने अधिकारियों के साथ उठकर चले गए। सिर्फ 15 मिनट में ही कार्यकारिणी की बैठक समाप्त हो गई। महापौर ने कहा कि अब चुप नहीं बैठूंगी, मामले को शासन तक ले जाऊंगी।
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एक माह में नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक बुधवार को चौथी बार बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई। करीब सवा दो बजे कार्यकारिणी की बैठक शुरू हुई तो महापौर प्रमिला पांडेय अधिवक्ता मो. जावेद और रिषभ अवस्थी के साथ आईं। दोनों अधिवक्ता समिति कक्ष में महापौर के पास बैठे तो नगर आयुक्त ने इस पर नाराजगी जताई। इस पर महापौर ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर विधिक राय लेने के लिए इन्हें लाई हूं क्योंकि मुझे ज्यादा कानूनी जानकारी नहीं है।
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इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि किसी बाहरी को कार्यकारिणी की बैठक में नहीं बैठा सकते। इस पर कार्यकारिणी के 12 पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के जोनल अधिकारी व अन्य भी तो बैठे हैं, फिर अधिवक्ताओं से आपत्ति क्यों। इस पर नगर आयुक्त ने साफ कह दिया कि अधिकारी तो नगर निगम के ही हैं लेकिन अधिवक्ता नहीं। महापौर बोलीं कि इनमें से अधिवक्ता रिषभ अवस्थी पैनल के हैं। नगर निगम अधिनियम- 117 के तहत आपको जवाब देना ही होगा।

नगर आयुक्त ने कहा कि नियमत: ही जवाब दूंगा और उठकर चले गए। उनके पीछे नगर निगम के सभी अधिकारी भी चले गए और महापौर भी बाहर आकर अपने कक्ष में बैठ गईं। बैठक रद्द कर दी गई। इसके बाद पत्रकार वार्ता में महापौर ने कहा कि अब मैं चुप नहीं बैठूंगी, मेरे पास सभी कागज हैं, शासन तक इन्हें पहुंचाऊंगी। पूरे मामले की जानकारी डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) को भी दूंगी।

 
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महापौर प्रमिला पांडेय - फोटो : अमर उजाला
नगर आयुक्त को घेरने की थी तैयारी
बैठक में पक्ष व विपक्ष के 12 कार्यकारिणी सदस्यों ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को घेरने की तैयारी की थी। कार्यकारिणी व सदन के फैसलों को निरस्त करने के मामले में उपसभापति अभिनव शुक्ला की अगुवाई में नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव बैठक में रखा जाना था। घर-घर कूड़ा उठान का टेंडर, मंगल भवन की समितियों को निरस्त करने, हाॅट मिक्स प्लांट के टेंडरों की जांच की समिति भंग करने और कन्वेंशन सेंटर में आय का शेयर नगर निगम को न दिए जाने का मुद्दा उठाया जाना था। नगर निगम निधि से स्वीकृत कार्यों, निविदाओं, बजट आवंटन व व्यय का लेखा-जोखा नगर निगम की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का प्रस्ताव रखा जाना था।

महापौर बोलीं- बगैर मुझसे पूछे मिनेट्स जारी नहीं कर सकते नगर आयुक्त
नगर आयुक्त के जाने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए महापौर ने कहा कि बैठक में शहर के मुद्दों को उठाना चाहते थे। चार दिन पहले पिछली कार्यकारिणी की मिनेट्स भेज दिए थे लेकिन बैठक शुरू होने पर नगर आयुक्त बोले कि मिनेट्स नहीं मिले हैं। साथ ही यह भी कहा कि मिनेट्स हम ही जारी करेंगे पर ऐसा नहीं होता है। नगर आयुक्त मिनेट्स पर सिर्फ हस्ताक्षर करते हैं जिसके बाद उसमें प्रस्ताव शामिल किए जाते हैं। 15वें वित्त की अध्यक्ष मैं हूं, बगैर मुझसे पूछे कार्यवृत्ति जारी नहीं कर सकते। कहा कि नगर आयुक्त ने लीगेसी वेस्ट के लिए तीन करोड़ का ठेका लवानिया ग्रुप को दे दिया। घर-घर कूड़ा उठान के लिए भी तीन कंपनियों का चयन कर लिया लेकिन कार्यकारिणी या सदन को जानकारी नहीं दी। 2021 में जब सदन में कन्वेंशन सेंटर पर मुहर लगी तो तय हुआ था कि महापौर और नगर आयुक्त मिलकर इसे देखेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

धरने पर बैठे पार्षद, नगर आयुक्त के खिलाफ की नारेबाजी
महापौर के समर्थन में कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ सत्ता व विपक्ष के पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद बाबा भीमराव आंबेडकर की फोटो हाथ में लेकर महापौर कार्यालय के बाहर लॉबी में धरने पर बैठ गए। नगर आयुक्त मुर्दाबाद, महापौर जिंदाबाद जैसे नारे लगाने लगे। कहा कि इस तरह से कार्यकारिणी की बैठक छोड़कर चले जाना संविधान का अपमान है, इसे सहन नहीं करेंगे।



 

कर्मचारी पर घूस का आरोप पर अभी भी कर रहा काम
महापौर ने कहा कि जन्म-मृत्यु कार्यालय में कर्मचारी की शिकायत मिली कि वह दो-दो हजार रुपये लेकर प्रमाण पत्र बनाते हैं। नगर आयुक्त से उस कर्मचारी को हटाने के लिए कहा लेकिन एक हफ्ता हो गया, कर्मचारी उसी सीट पर बैठा काम कर रहा है। इससे पहले भी कई कर्मचारियों की शिकायतें मिलीं तो उन्हें हटाने के लिए कहा लेकिन नगर आयुक्त ने उन मामलों में भी कुछ नहीं किया।

मैंने मंगलवार को नगर आयुक्त को बुलाया था। कहा था कि बुधवार को कार्यकारिणी है, प्रस्ताव पर जवाब देने हैं और शहर के विकास पर चर्चा भी होनी है। वह बोले कि अधिनियम के तहत ही जवाब देंगे। मुझे कानून की जानकारी नहीं रहती, इसलिए एक पत्र नगर आयुक्त को भेजा कि विधिक राय के लिए पैनल के अधिवक्ता शामिल किए जाएं। उन्होंने इस पर जवाब नहीं दिया तो मैं खुद पैनल के अधिवक्ता रिषभ को साथ ले गई जबकि मो. जावेद उनके साथ आए थे। अगर अधिवक्ताओं को लाने पर आपत्ति थी तो मेरे पत्र भेजने पर ही बता देते, नहीं ले जाते। इस तरह बैठक छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। - प्रमिला पांडेय, महापौर

कार्यकारिणी की बैठक में महापौर, कार्यकारिणी के पार्षद, नगर आयुक्त और नगर निगम के अधिकारी ही बैठते हैं। मैं किसी भी बाहरी व्यक्ति को कोई जवाब नहीं दूंगा। - अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
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