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कानपुर: सीआईएसएफ को साइबर हमलों का तोड़ सिखाएगा आईआईटी, प्रशिक्षण लेंगे जवान
Tue, 15 Sep 2026 09:45 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 15 Sep 2026 09:45 PM IST
सार
Kanpur News: राजस्थान में ड्रोन तकनीक का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खुलेगा। दोनों संस्थानों के बीच एमओयू साइन हुआ।
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आईआईटी कानपुर और सीआईएसएफ के अधिकारियों के बीच हुआ एमओयू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीआईएसएफ को ड्रोन तकनीक में पारंगत बनाने के साथ साइबर हमलों से बचाने की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने ली है। इसके लिए दोनों संस्थानों के बीच मंगलवार को एमओयू साइन किया गया। सीआईएसएफ के जवानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। राजस्थान के बहरोड़ में ड्रोन तकनीक का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा।
इंजीनियर्स दिवस के मौके पर हुए समझौते में सीआईएसएफ एमपीआरटीसी बहरोड़ के डीआईजी डॉ. सी धनंजय नाइक और आईआईटी कानपुर के डीन आरएंड डी प्रो. जयधरन जी राव ने हस्ताक्षर किए। सीआईएसएफ पहले से ही आईआईटी मद्रास, आईआईटी रोपड़, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया समेत कई तकनीकी संस्थानों के साथ काम कर रहा है। आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग से सीआईएसएफ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए स्वदेशी ड्रोन और साइबर सुरक्षा समाधान विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
40 जवानों की छह सप्ताह होगी ट्रेनिंग
सीआईएसएफ जवानों का छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। प्रत्येक बैच में 40 जवान प्रशिक्षण लेंगे। यह निशुल्क होगा। इसमें विमानन, पावर और न्यूक्लियर सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर होने वाले साइबर हमलों से निपटने की तकनीक सिखाई जाएगी। क्रिटिकल इंफार्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, इंसिडेंट रिस्पांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-मशीन लर्निंग, डीपफेक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी शामिल रहेंगी। जवानों को वास्तविक साइबर संकट जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने के लिए क्राइसिस सिमुलेशन भी कराया जाएगा।
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इंजीनियर्स दिवस के मौके पर हुए समझौते में सीआईएसएफ एमपीआरटीसी बहरोड़ के डीआईजी डॉ. सी धनंजय नाइक और आईआईटी कानपुर के डीन आरएंड डी प्रो. जयधरन जी राव ने हस्ताक्षर किए। सीआईएसएफ पहले से ही आईआईटी मद्रास, आईआईटी रोपड़, आईआईआईटीडीएम कांचीपुरम और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया समेत कई तकनीकी संस्थानों के साथ काम कर रहा है। आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग से सीआईएसएफ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए स्वदेशी ड्रोन और साइबर सुरक्षा समाधान विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
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40 जवानों की छह सप्ताह होगी ट्रेनिंग
सीआईएसएफ जवानों का छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। प्रत्येक बैच में 40 जवान प्रशिक्षण लेंगे। यह निशुल्क होगा। इसमें विमानन, पावर और न्यूक्लियर सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर होने वाले साइबर हमलों से निपटने की तकनीक सिखाई जाएगी। क्रिटिकल इंफार्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, इंसिडेंट रिस्पांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-मशीन लर्निंग, डीपफेक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी शामिल रहेंगी। जवानों को वास्तविक साइबर संकट जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने के लिए क्राइसिस सिमुलेशन भी कराया जाएगा।
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