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Kanpur: अखिलेश के खिलाफ 4500 पेज की पहली चार्जशीट तैयार, काॅल डिटेल बने आधार
Mon, 22 Sep 2025 11:52 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 22 Sep 2025 11:52 AM IST
सार
Kanpur News: बर्रा थाने में छह अगस्त को दर्ज मामले में अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ नौबस्ता पुलिस ने जांच की है।
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अधिवक्ता अखिलेश दुबे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भाजपा नेता रवि सतीजा की शिकायत पर जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उसके करीबी लवी मिश्रा के खिलाफ पहली चार्जशीट तैयार हो गई है। यह करीब 4500 पेज की है। इसमें गवाहों के बयान और कॉल डिटेल रिकाॅर्ड को अहम आधार बनाया गया है। चार्जशीट को नौबस्ता पुलिस अगले सप्ताह कोर्ट में दाखिल करेगी।
बर्रा निवासी भाजपा नेता रवि सतीजा ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाकर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से गुहार लगाई थी कि अखिलेश ने विमल यादव और उसकी करीबी महिला के माध्यम से उस पर दुष्कर्म का झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में इसमें एफआर लगा दी गई थी। कमिश्नर ने उनके प्रार्थना पत्र को एसआईटी को भेज दिया था जहां प्राथमिक जांच के बाद आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने बर्रा थाने में रवि सतीजा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद एसआईटी कार्यालय में बयान दर्ज कराने पहुंचे अखिलेश दुबे को गिरफ्तार कर लिया गया था।
रवि ने बर्रा पुलिस पर अखिलेश के इशारों पर काम करने का आरोप लगाकर मामले की विवेचना किसी अन्य थाने से कराने की मांग की थी। इसके बाद डीसीपी साउथ ने मामले की विवेचना का जिम्मा नौबस्ता इंस्पेक्टर को दिया था। उन्होंने जांच के दौरान आरोपियों से लेकर पीड़ित और दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी, उसकी बहन तक के बयान दर्ज किए। अखिलेश की ओर से रवि को की गई कॉल और मैसेज को भी साक्ष्यों के रूप में संकलित किया है।
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एडीसीपी साउथ योगेश कुमार ने बताया कि चार्जशीट लगभग तैयार है। हालांकि मामले के दो आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हो पाए हैं। उन्हें छोड़ बाकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
पांच एफआईआर के बाद फूंक-फूंककर कदम रख रही पुलिस
कानपुर। दरबार के राजा चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर सात दिनों में दर्ज की गई कुल पांच एफआईआर के बाद पुलिस अब अपने कदम फूंक-फूंककर बढ़ा रही है। पिछले दो माह में 50 से ज्यादा शिकायतों का पुलिंदा एसआईटी और पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है। 15 से अधिक प्रार्थना पत्रों की जांच पूरी की जा चुकी है लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस के हाथ बंध जा रहे हैं। मालूम हो इसके मामलों की पुन: जांच के लिए पुरानी एसआईटी को भंग कर नई गठित की गई थी। पुलिस ने न तो अब तक अखिलेश की रिमांड ली और न ही आगे की कार्रवाई तेजी से कर रही है। कमिश्नरी के अधिकारियों का साफ कहना है कि एक-एक मामले की निष्पक्षता से जांच की जा रही है। जिनमें साक्ष्य मिल रहे है, उन मामलों में रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
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बर्रा निवासी भाजपा नेता रवि सतीजा ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाकर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से गुहार लगाई थी कि अखिलेश ने विमल यादव और उसकी करीबी महिला के माध्यम से उस पर दुष्कर्म का झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में इसमें एफआर लगा दी गई थी। कमिश्नर ने उनके प्रार्थना पत्र को एसआईटी को भेज दिया था जहां प्राथमिक जांच के बाद आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने बर्रा थाने में रवि सतीजा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद एसआईटी कार्यालय में बयान दर्ज कराने पहुंचे अखिलेश दुबे को गिरफ्तार कर लिया गया था।
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रवि ने बर्रा पुलिस पर अखिलेश के इशारों पर काम करने का आरोप लगाकर मामले की विवेचना किसी अन्य थाने से कराने की मांग की थी। इसके बाद डीसीपी साउथ ने मामले की विवेचना का जिम्मा नौबस्ता इंस्पेक्टर को दिया था। उन्होंने जांच के दौरान आरोपियों से लेकर पीड़ित और दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी, उसकी बहन तक के बयान दर्ज किए। अखिलेश की ओर से रवि को की गई कॉल और मैसेज को भी साक्ष्यों के रूप में संकलित किया है।
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एडीसीपी साउथ योगेश कुमार ने बताया कि चार्जशीट लगभग तैयार है। हालांकि मामले के दो आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हो पाए हैं। उन्हें छोड़ बाकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
पांच एफआईआर के बाद फूंक-फूंककर कदम रख रही पुलिस
कानपुर। दरबार के राजा चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर सात दिनों में दर्ज की गई कुल पांच एफआईआर के बाद पुलिस अब अपने कदम फूंक-फूंककर बढ़ा रही है। पिछले दो माह में 50 से ज्यादा शिकायतों का पुलिंदा एसआईटी और पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है। 15 से अधिक प्रार्थना पत्रों की जांच पूरी की जा चुकी है लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस के हाथ बंध जा रहे हैं। मालूम हो इसके मामलों की पुन: जांच के लिए पुरानी एसआईटी को भंग कर नई गठित की गई थी। पुलिस ने न तो अब तक अखिलेश की रिमांड ली और न ही आगे की कार्रवाई तेजी से कर रही है। कमिश्नरी के अधिकारियों का साफ कहना है कि एक-एक मामले की निष्पक्षता से जांच की जा रही है। जिनमें साक्ष्य मिल रहे है, उन मामलों में रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।