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Kanpur Fire: दुकान के पीछे रखे थे तीन सिलिंडर... फटते तो होती तबाही, प्लास्टिक और फाइबर के खिलौनों से भड़की आग

Mon, 05 May 2025 12:31 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 05 May 2025 12:31 PM IST
सार

कानपुर के नवाबगंज इलाके के सराफा मार्केट में रविवार तड़के शार्ट सर्किट से खिलौनों की दुकान में आग लग गई, आग से पीछे के कमरे में सो रहे बुजुर्ग कारोबारी की दम घुटने से मौत हो गई। 

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Kanpur Fire Three cylinders were kept behind shop if they had exploded, it would have been devastating
Kanpur Fire - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में खिलौनों की दुकान में लगी आग अगर आंगन तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। अंदर एलपीजी के तीन भरे हुए सिलिंडर रखे हुए थे। लपटों और धुएं की गर्मी से सभी बुरी तरह से तप रहे थे। अगर सिलिंडर तक आग जाती तो फटने की बिल्कुल आशंका थी। 
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दमकल और पुलिस कर्मियों की नजर जब सिलिंडर पर पड़ी तो एकबार उनकी हिम्मत भी जवाब दे गई, लेकिन फिर साहस कर उन्हें बाहर रखवाया गया। गर्म सिलिंडर की वजह से फायर ब्रिगेड स्टाफ के सुरक्षा दस्ताने तक जल गए। 
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गर्म सिलिंडर का तापमान कम करने के लिए बाहर पानी की बौछार डालने के साथ ही मोहल्ले से ठंडा पानी मंगवाकर उस पर गिराया गया। गैस एजेंसी के कर्मचारी को बुलाकर सिलिंडर की जांच कराई गई। 
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पहली मंजिल पर बने रसोईघर के दो सिलिंडर को भी बाहर निकाला गया। यह बिल्डिंग घनी आबादी वाले क्षेत्र में है, जहां दुकानों के साथ काफी संख्या में आवास हैं। पतली सड़क होने से अग्निशमन वाहनों का आना भी मुश्किल होता। बचाव कार्य में टीम को कठिनाई भी हुई।

बिल्डिंग में आने और जाने का एक ही रास्ता
मिठाई कारोबारी की तीन मंजिला बिल्डिंग में आने और जाने का एक ही रास्ता है। यहीं से सभी लोग आते और जाते हैं। यही रास्ता आंगन और रसोईघर तक जाता है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी और नवाबगंज इंस्पेक्टर ने बिल्डिंग का मुआयना किया तो उन्होंने खतरे का अहसास किया। 

 

उन्होंने कहा कि गनीमत रही की आग पहली मंजिल तक नहीं पहुंची नहीं तो बचाव कार्य करना मुश्किल हो जाता। मुख्य अग्नि अधिकारी के मुताबिक बुजुर्ग को बाहर निकालने के लिए मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक छह ताले तोड़े फिर उन्हें निकाला जा सका।

प्लास्टिक और फाइबर के खिलौनों से भड़की आग
कानपुर में भूतल की दोनों दुकानें खिलौनों से भरी हुई थी। यहां काफी संख्या में प्लास्टिक, फाइबर, रबर के खिलौनों के साथ रेक्रॉन और फाइबर के टेडी रखे हुए थे, जिनमें आग लगते ही तेजी से भड़क उठी। दमकल कर्मियों ने आग की लपटों पर पानी डाला तो यह तेजी से ऊपर की ओर उठने लगी। फायर कर्मियों ने तीनों गाड़ियों से एक साथ पानी डालकर एक घंटे में आग पर काबू पाया। 

दुकान के अंदर की दीवार की हालत देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। अंदर जगह जगह प्लास्टर उखड़ गए थे, जबकि कुछ जगह दरारें भी आ गईं थी। दीवारें दोपहर तक तप रहीं थी। सीएफओ दीपक शर्मा ने बताया कि दीवार और फिर कमरे का दरवाजा तोड़ बुजुर्ग को बाहर निकाला गया। उनको हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
 

धुएं से बचने के लिए की मशक्कत
कारोबारी ने धुएं और आग से बचने के लिए काफी मशक्कत की थी। उन्होंने चेहरे, नाक और मुंह को अंगौछे से ढंक रखा था। यह जानकारी फायर ब्रिगेड कर्मियों को बचाव कार्य के दौरान हुई। उनको कमरे से निकालने के लिए जब टीम पहुंची तो वह बेहोशी की हालत में थे। उन्होंने अपने चेहरे पर अंगौछा ओढ़ रखा था। परिजन भी उनके मशक्कत करने का कयास लगा रहे हैं।

सराफा और मिठाई की दुकानें रही बंद
रविवार को आसपास की सराफा और मिठाई की दुकानों को बंद रखा गया। व्यापारी व समाजसेवी उनके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। परिजनों का भी कहना था कि शनिवार को वह दर्दनाक रात को वह लोग मरते दम तक नहीं भूल पाएंगे।

 

खिलौनों की दुकान में लगी आग, दम घुटने से बुजुर्ग कारोबारी की मौत
नवाबगंज क्षेत्र के सराफा मार्केट में रविवार तड़के शार्ट सर्किट से खिलौनों की दुकान में आग लग गई, जिसकी वजह से पीछे के कमरे में सो रहे बुजुर्ग कारोबारी की दम घुटने से मौत हो गई। देखते ही देखते लपटें ऊपर की ओर उठीं। आग और धुआं देख पहली मंजिल पर रहने वाले दो परिवारों के सदस्यों ने पड़ोसी की छत फांदकर जान बचाई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाई।

35 हजार रुपये की नकदी और चार लाख रुपये का माल जल गया है। नवाबगंज सराफा मार्केट में जय प्रकाश गुप्ता (85) की पिता श्यामलाल के नाम से 122 वर्ष पुरानी मिठाई की दुकान है। वह कुछ समय से तीन मंजिला बिल्डिंग के भूतल में खिलौने का कारोबार कर रहे थे। मिठाई का व्यापार उनके पौत्र आयुष संभाल रहे हैं। बिल्डिंग के भूतल में नवाबगंज निवासी मनोज जैन की कपड़ों की दुकान है। उसके बगल की दो दुकानों में जय प्रकाश गुप्ता खिलौनों का कारोबार कर रहे थे।

 

दुकान के ठीक पीछे आंगन और उसके बाद उनका कमरा है। जय प्रकाश की पत्नी कमला देवी काफी समय पहले दिवंगत हो गईं। बेटे प्रदीप का 2004 में बीमारी के चलते, जबकि सुशील गुप्ता का 2001 हादसे में निधन हो चुका है। तीसरा बेटा संजय घर के पास ही रहता है। सुशील की पत्नी अर्चना बेटे तुषार और प्रदीप की पत्नी रेशम बेटी आंशी व बेटे आयुष के साथ प्रथम तल पर रहती हैं। आंशी इन दिनों पुणे में सीए की तैयारी कर रही हैं।
 

रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे अचानक खिलौनों की दुकान से धुआं निकलना शुरू हो गया। देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगी। मोहल्ले में चीख पुकार मच गई। नवाबगंज पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मी आ गए। उन्होंने बचाव कार्य शुरू किया। लपटें पहली मंजिल को चपेट में लेने लगीं। पहली मंजिल पर सो रहे दोनों अर्चना, रेशम, तुषार, आयुष में चीख पुकार मच गई। उन्होंने पड़ोसी अनिल रावत के मकान में फांदकर जान बचाई। फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई। आंगन और कमरे में धुआं ही धुआं भरा हुआ था। दमकल कर्मियों ने मशक्कत कर बुजुर्ग कारोबारी को बाहर निकाला और हैलट ले गए। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

यह भी पढ़ें: Kanpur Fire Incident: 'बच्चों को बचा लो...', तीन धमाके और ऊंची-ऊंची लपटें देख दहल उठे लोग, इमारत में आई दरार



 
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