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कानपुर: जिलाधिकारी ने शहर की समस्याओं को लेकर लिए अहम फैसले, बोले- स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात और सड़क पर रहेगा फोकस
Thu, 14 Oct 2021 11:06 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 14 Oct 2021 11:06 AM IST
सार
जिलाधिकारी ने बताया कि कलक्ट्रेट व कचहरी के आसपास एक मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इससे पार्किंग व्यवस्था बेहतर हो सकेगी और जाम से राहत मिलेगी।
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जिलाधिकारी विशाख जी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिलाधिकारी विशाख जी. ने बुधवार को शहर की समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। अमर उजाला बेस (बिजनेस, एकेडमिक एंड सोशल इंटरप्रेन्योर) प्लेटफार्म के सदस्यों के साथ फजलगंज स्थित अमर उजाला कार्यालय में बैठक के दौरान उन्होंने बताया कि सड़कों की बार बार होने वाली खुदाई पर अंकुश लगाएंगे।
खुदाई की अनुमति देने की एकल व्यवस्था बनाई जाएगी। साथ ही खोदी गई सड़क को बनाने की समय सीमा भी तय की जाएगी। देरी होने पर पेनाल्टी भी लगाई जाएगी। जो विभाग खुदाई कर रहा है, उसके काम का समय के हिसाब से औचित्य भी देखा जाएगा।
जैसे त्योहार के समय में कोई सड़क तभी खोदी जा सकती है, जब बहुत आवश्यक हो। उन्होंने बताया कि उनका ट्रैफिक, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस ज्यादा है। अस्पतालों में डॉक्टर और स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य रूप से हो, इसकी लगातार मानीटरिंग की व्यवस्था शुरू की गई है।
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सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की कायाकल्प योजना भी शुरू की गई है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभागों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक खामियों को दूर करने के लिए शहर में 590 कैमरे लगाए गए हैं। हर चौराहे पर लाइट का समय निर्धारित करने पर भी काम किया जा रहा है।
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खुदाई की अनुमति देने की एकल व्यवस्था बनाई जाएगी। साथ ही खोदी गई सड़क को बनाने की समय सीमा भी तय की जाएगी। देरी होने पर पेनाल्टी भी लगाई जाएगी। जो विभाग खुदाई कर रहा है, उसके काम का समय के हिसाब से औचित्य भी देखा जाएगा।
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जैसे त्योहार के समय में कोई सड़क तभी खोदी जा सकती है, जब बहुत आवश्यक हो। उन्होंने बताया कि उनका ट्रैफिक, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस ज्यादा है। अस्पतालों में डॉक्टर और स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य रूप से हो, इसकी लगातार मानीटरिंग की व्यवस्था शुरू की गई है।
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सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की कायाकल्प योजना भी शुरू की गई है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभागों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक खामियों को दूर करने के लिए शहर में 590 कैमरे लगाए गए हैं। हर चौराहे पर लाइट का समय निर्धारित करने पर भी काम किया जा रहा है।
कचहरी के आसपास मल्टीस्टोरी पार्किंग
जिलाधिकारी ने बताया कि कलक्ट्रेट व कचहरी के आसपास एक मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इससे पार्किंग व्यवस्था बेहतर हो सकेगी और जाम से राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ बाजारों में भी सर्वे कराकर पार्किंग की व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्हाेंने कचहरी परिसर में एक वातानुकूलित कैंटीन की योजना पर भी काम करने पर जोर दिया।
64 स्थानों पर लगाए गए वाईफाई
जिलाधिकारी के अनुसार स्मार्ट सिटी के तहत शहर के 64 स्थानों पर वाईफाई की व्यवस्था की गई है। इससे जुड़ने के लिए मोबाइल पर ओटीपी आएगा, इसे डालने के बाद वाईफाई काम करना शुरू कर देगा।
दक्षिणी इलाके पर होगा ज्यादा फोकस
जिलाधिकारी ने कहाकि शहर के दक्षिणी क्षेत्र में भी अफसरों की भागीदारी हो, वहां की समस्याओं पर गंभीरता से काम हो, इसके लिए भी सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कराएंगे। दक्षिण में अफसरों का फोकस कम रहता है, इसलिए बीते 20 दिन में वे करीब आठ बार इस तरफ आए हैं ताकि स्थितियां समझी जा सकें।
जिलाधिकारी ने बताया कि कलक्ट्रेट व कचहरी के आसपास एक मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इससे पार्किंग व्यवस्था बेहतर हो सकेगी और जाम से राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ बाजारों में भी सर्वे कराकर पार्किंग की व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्हाेंने कचहरी परिसर में एक वातानुकूलित कैंटीन की योजना पर भी काम करने पर जोर दिया।
64 स्थानों पर लगाए गए वाईफाई
जिलाधिकारी के अनुसार स्मार्ट सिटी के तहत शहर के 64 स्थानों पर वाईफाई की व्यवस्था की गई है। इससे जुड़ने के लिए मोबाइल पर ओटीपी आएगा, इसे डालने के बाद वाईफाई काम करना शुरू कर देगा।
दक्षिणी इलाके पर होगा ज्यादा फोकस
जिलाधिकारी ने कहाकि शहर के दक्षिणी क्षेत्र में भी अफसरों की भागीदारी हो, वहां की समस्याओं पर गंभीरता से काम हो, इसके लिए भी सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कराएंगे। दक्षिण में अफसरों का फोकस कम रहता है, इसलिए बीते 20 दिन में वे करीब आठ बार इस तरफ आए हैं ताकि स्थितियां समझी जा सकें।
अनियोजित विकास शहर की सबसे बड़ी समस्या
अमर उजाला बेस (बिजनेस एकेडमिक एंड सोशल इंटरप्रेन्योर) प्लेटफार्म के सदस्यों ने बुधवार को जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर के समक्ष शहर की प्रमुख समस्याएं रखीं और उनके निराकरण के सुझाव दिए। सदस्यों ने बताया कि अनियोजित विकास शहर की सबसे बड़ी समस्या है। इससे प्रदूषण, सड़कों की खराब स्थिति, अव्यवस्थित यातायात की समस्या पैदा हो जाती है। स्वास्थ्य, शिक्षा और पार्किंग की बदहाली का मसला भी उठाया। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि इन समस्याओं के निराकरण के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। विभागों के साथ आम लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। आने वाले दिनों में सकारात्मक बदलाव दिखेंगे।
इन्होंने रखी अपनी बातें
शहर में कई गैर पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं, जो वायु प्रदूषण के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है।- वैभव अग्निहोत्री, कंपनी सचिव
उर्सला हास्पिटल में वेंटिलेटर होने के बावजूद सही चिकित्सा का अभाव है। उर्सला और हैलट दोनों जगहों पर चिकित्सकों की कमी है। सीएचसी व पीएचसी में तमाम जरूरी जांचों की सुविधा नहीं है।- डा. सुरभि मिश्रा चिकित्सक एवं लेखिका
शहर और दक्षिण कानपुर के बीच लगातार दूरी बढ़ रही है। दक्षिण उपेक्षित जैसा रहता है। ऐसा लगता है कि उत्तर क्षेत्र को शहर और दक्षिण को गांव की श्रेणी में रखा गया है। यह व्यवस्था बदलनी चाहिए।- गरिमा सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट
कानपुर औद्योगिक सिटी होने की वजह से यहां पर एक स्टार्टअप पॉलिसी होनी चाहिए। साथ ही शहर की समस्याओं को लोगों को दिखाने की भी आवश्यकता है, जिससे लोग सबक ले सकें।- अक्षय के गुप्ता, इंटरप्रेन्योर
अमर उजाला बेस (बिजनेस एकेडमिक एंड सोशल इंटरप्रेन्योर) प्लेटफार्म के सदस्यों ने बुधवार को जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर के समक्ष शहर की प्रमुख समस्याएं रखीं और उनके निराकरण के सुझाव दिए। सदस्यों ने बताया कि अनियोजित विकास शहर की सबसे बड़ी समस्या है। इससे प्रदूषण, सड़कों की खराब स्थिति, अव्यवस्थित यातायात की समस्या पैदा हो जाती है। स्वास्थ्य, शिक्षा और पार्किंग की बदहाली का मसला भी उठाया। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि इन समस्याओं के निराकरण के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। विभागों के साथ आम लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। आने वाले दिनों में सकारात्मक बदलाव दिखेंगे।
इन्होंने रखी अपनी बातें
शहर में कई गैर पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं, जो वायु प्रदूषण के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है।- वैभव अग्निहोत्री, कंपनी सचिव
उर्सला हास्पिटल में वेंटिलेटर होने के बावजूद सही चिकित्सा का अभाव है। उर्सला और हैलट दोनों जगहों पर चिकित्सकों की कमी है। सीएचसी व पीएचसी में तमाम जरूरी जांचों की सुविधा नहीं है।- डा. सुरभि मिश्रा चिकित्सक एवं लेखिका
शहर और दक्षिण कानपुर के बीच लगातार दूरी बढ़ रही है। दक्षिण उपेक्षित जैसा रहता है। ऐसा लगता है कि उत्तर क्षेत्र को शहर और दक्षिण को गांव की श्रेणी में रखा गया है। यह व्यवस्था बदलनी चाहिए।- गरिमा सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट
कानपुर औद्योगिक सिटी होने की वजह से यहां पर एक स्टार्टअप पॉलिसी होनी चाहिए। साथ ही शहर की समस्याओं को लोगों को दिखाने की भी आवश्यकता है, जिससे लोग सबक ले सकें।- अक्षय के गुप्ता, इंटरप्रेन्योर
आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार की जरूरत है। पानी, शौचालय, सफाई सभी को बेहतर करने की आवश्यकता है। केंद्रों के भवन भी ठीक नहीं हैं। इससे बच्चों को परेशानी होती है।- डॉ. सबा यूनुस, शिक्षिका एवं समाजसेवी
शहर में कला और संस्कृति को लेकर सुविधाओं का अभाव है। कोई ऐसा थियेटर नहीं है, जहां पर बिना अधिक लागत के कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके।- राघव त्रिपाठी, थियेटर आर्टिस्ट
शहर और इसके आसपास सड़कों पर आवारा जानवरों की स्थिति काफी चिंताजनक है। पौधरोपण से ज्यादा पेड़ों को काटा जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।- डॉ. अंकिता यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर
शहर में सार्वजनिक शौचालय की कमी है। खासकर बाजारों में इनका पूरी तरह से अभाव है। महिलाओं को बहुत परेशानी होती है। इसी तरह बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित होने चाहिए। - प्रेरणा वर्मा, उद्यमी
कचहरी और कलक्ट्रेट परिसर में डस्टबिन नहीं हैं। यहां पर एक वातानुकूलित कैंटीन की जरूरत है। साथ ही इसके आसपास पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा के इंतजाम बेहतर करने की आवश्यकता है।- हेमंत तिवारी, एडवोकेट
शहर में कला और संस्कृति को लेकर सुविधाओं का अभाव है। कोई ऐसा थियेटर नहीं है, जहां पर बिना अधिक लागत के कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके।- राघव त्रिपाठी, थियेटर आर्टिस्ट
शहर और इसके आसपास सड़कों पर आवारा जानवरों की स्थिति काफी चिंताजनक है। पौधरोपण से ज्यादा पेड़ों को काटा जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।- डॉ. अंकिता यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर
शहर में सार्वजनिक शौचालय की कमी है। खासकर बाजारों में इनका पूरी तरह से अभाव है। महिलाओं को बहुत परेशानी होती है। इसी तरह बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित होने चाहिए। - प्रेरणा वर्मा, उद्यमी
कचहरी और कलक्ट्रेट परिसर में डस्टबिन नहीं हैं। यहां पर एक वातानुकूलित कैंटीन की जरूरत है। साथ ही इसके आसपास पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा के इंतजाम बेहतर करने की आवश्यकता है।- हेमंत तिवारी, एडवोकेट