Kanpur Dehat: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, दो भाइयों को 20-20 साल कैद, सहयोग करने में महिला को भी सुनाई सजा
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 13 पॉक्सो बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही थी। शुक्रवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रज्जन लाल और उसके भाई अरुण कुमार को दोषी करार देते हुए 20-20 साल व शांति देवी को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है।
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कानपुर देहात में कानपुर नगर के शिवराजपुर क्षेत्र में नाबालिग से लगातार सात महीनों तक हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में शुक्रवार को पॉक्सो कोर्ट ने दो दोषियों को 20-20 साल की सजा सुनाई है। घटना में सहयोगी रही एक दोषी की पत्नी को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है।
एक नर्स को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता राम रक्षित शर्मा व विकास सिंह ने बताया कि शिवराजपुर क्षेत्र के एक गांव निवासी नाबालिग (14) ने मई 2014 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि वह कक्षा पांच की छात्रा है।
गांव निवासी रज्जन लाल और उसके भाई अरुण कुमार लगातार सात महीनों से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर रहे हैं। इसमें रज्जन लाल की पत्नी शांति देवी सहयोग करती थी। वह उसे बहलाकर अपने घर ले जाती थी और कमरे में बंद कर देती थी। वह गर्भवती हो गई तो 10 मई 2014 को इन लोगों ने गांव की एक नर्स को बुलाकर उसका गर्भपात करा दिया था।
पुलिस ने मामले में विवेचना कर सभी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 13 पॉक्सो बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही थी। शुक्रवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रज्जन लाल और उसके भाई अरुण कुमार को दोषी करार देते हुए 20-20 साल व शांति देवी को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है।
दोषी रज्जन लाल और अरुण कुमार पर 31-31 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास काटने का दंड दिया है। वहीं दोषी शांति देवी पर एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। वहीं मामले में आरोपी नर्स को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।