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कानपुर देहात : बेहमई केस में अदालत से न्याय की आस लिए चल बसीं हिम्मत सिंह की पत्नी रामरती
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राजपुर (कानपुर देहात) बेहमई नरसंहार कांड में मारे गए हिम्मत सिंह की पत्नी रामरती देवी का गुरुवार रात 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। इसकी सूचना पर गांव वालों ने शोक जताया।
रामरती देवी के बेटे बाबूजी सिंह ने बताया कि कोर्ट से अब तक फैसला नहीं आने से मां दुखी रहती थीं। शुक्रवार को बेहमई स्थित यमुना नदी घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में फूलन देवी ने 20 निर्दोष लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया था।
नरसंहार में बेहमई गांव के हिम्मत सिंह (35) व उनके परिवार के तुलसीराम और सुरेंद्र सिंह मारे गए थे। घटना के 41 वर्ष बीतने के बावजूद कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है। इधर न्याय की आस में मुकदमे के वादी राजाराम सिंह, गवाह जंटर सिंह के अलावा कई लोगों की मौत हो चुकी है।
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अपनों को खोने का गम आज भी बेहमई के लोगों में देखा जाता है। रामरती देवी के बेटे बाबू जी सिंह ने बताया कि मां कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही थीं। हर तारीख पर वह कोर्ट में होने वाली कार्रवाई की जानकारी लेती रहती थीं।
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रामरती देवी के बेटे बाबूजी सिंह ने बताया कि कोर्ट से अब तक फैसला नहीं आने से मां दुखी रहती थीं। शुक्रवार को बेहमई स्थित यमुना नदी घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में फूलन देवी ने 20 निर्दोष लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया था।
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नरसंहार में बेहमई गांव के हिम्मत सिंह (35) व उनके परिवार के तुलसीराम और सुरेंद्र सिंह मारे गए थे। घटना के 41 वर्ष बीतने के बावजूद कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है। इधर न्याय की आस में मुकदमे के वादी राजाराम सिंह, गवाह जंटर सिंह के अलावा कई लोगों की मौत हो चुकी है।
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अपनों को खोने का गम आज भी बेहमई के लोगों में देखा जाता है। रामरती देवी के बेटे बाबू जी सिंह ने बताया कि मां कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही थीं। हर तारीख पर वह कोर्ट में होने वाली कार्रवाई की जानकारी लेती रहती थीं।