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कानपुर देहात : नौ लाख में बने सिर्फ 2.90 लाख आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य कर्मियों को खोजे नहीं मिल रहे योजना के लाभार्थी
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कानपुर देहात। केंद्र सरकार की ओर से जिले को नौ लाख परिवारों का प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य मिला था। इसमें से अभी तक 2.90 लाख परिवारों के ही कार्ड बन सके हैं।
धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य कारण सरकार की ओर से जारी सूची में कई ऐसे लाभार्थी हैं, जो अपने पते पर मिल नहीं रहे हैं। इनको खोजने में स्वास्थ्य विभाग के लोगों का पसीना छूट रहा है।
गरीबों के पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की थी। इसके तहत पात्र परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें मरीज के इलाज के पैसे का भुगतान सरकार करती है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सरकार की ओर से जनपद में नौ लाख गरीब परिवारों की सूची स्वास्थ्य विभाग भेजी थी। इसमें से अभी तक विभाग की ओर से 2.90 लाख परिवारों के कार्ड बन चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सूची के अनुसार लाभार्थियों को खोजकर उनके कार्ड बनवा रहे हैं। इस दौरान काफी संख्या में ऐसे लाभार्थी भी सामने आ रहे हैं जो पूर्व में दर्ज पते से कहीं और जा चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को इन लाभार्थी परिवारों को खोजने में काफी समय लग रहा है।
नौ लाख गरीब परिवारों के कार्ड बनने का लक्ष्य मिला था। इसमें आधे से ज्यादा लोग अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं। इससे उनका कार्ड नहीं बन पा रहा है। यह बात अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी है। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ।
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धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य कारण सरकार की ओर से जारी सूची में कई ऐसे लाभार्थी हैं, जो अपने पते पर मिल नहीं रहे हैं। इनको खोजने में स्वास्थ्य विभाग के लोगों का पसीना छूट रहा है।
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गरीबों के पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की थी। इसके तहत पात्र परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें मरीज के इलाज के पैसे का भुगतान सरकार करती है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सरकार की ओर से जनपद में नौ लाख गरीब परिवारों की सूची स्वास्थ्य विभाग भेजी थी। इसमें से अभी तक विभाग की ओर से 2.90 लाख परिवारों के कार्ड बन चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सूची के अनुसार लाभार्थियों को खोजकर उनके कार्ड बनवा रहे हैं। इस दौरान काफी संख्या में ऐसे लाभार्थी भी सामने आ रहे हैं जो पूर्व में दर्ज पते से कहीं और जा चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को इन लाभार्थी परिवारों को खोजने में काफी समय लग रहा है।
नौ लाख गरीब परिवारों के कार्ड बनने का लक्ष्य मिला था। इसमें आधे से ज्यादा लोग अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं। इससे उनका कार्ड नहीं बन पा रहा है। यह बात अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी है। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ।