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कानपुर देहात : सूर्य उपासना का पर्व छठ आज से, लोगों ने तैयारियां की पूरी

Mon, 08 Nov 2021 01:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 01:30 AM IST
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Kanpur dehat : Chhath, the festival of sun worship, from today, people completed preparations
नबीपुर में बंबा किनारे छठ पूजा के लिए सफाई करते लोग। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ आठ नवंबर से शुरू होगा, जो 11 नवंबर तक चलेगा। अस्त होते सूर्य देव को पहला अर्घ्य 10 नवंबर को दिया जाएगा।
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जबकि उगते हुए सूरज को अर्घ्य अगले दिन यानी 11 नवंबर को दिया जाएगा। जिले में छठ पूजा की तैयारी तेज हो गई हैं। लोगों ने रविवार को नबीपुर बंबा घाट पर साफ-सफाई की। वहीं अकबरपुर में खरका बंबा घाट पर भी श्रद्धालुओं ने सफाई की।
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भगवान सूर्य की चार दिवसीय उपासना का महापर्व छठ सोमवार को चतुर्थी के दिन शुरू होगा। महिलाएं संतान प्राप्ति और उसकी लंबी आयु के लिए छठ का व्रत रखती हैं। जिसमें सात्विक भोजन कद्दू और लौकी की सब्जी, चने की दाल और हाथ की चक्की से पीसे गए आटे की रोटियां खाई जाती है। इसे नहाय खाय भी कहा जाता है।
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इसके अगले दिन पंचमी तिथि को मंगलवार की शाम को लोग स्नान, ध्यान के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। प्रसाद के तौर पर गुड़, चावल की खीर खाई जाती है। जिसे अन्य भक्तों को भी वितरित किया जाता है।
इसे खरना कहते है। इसके बाद व्रत रखकर बुधवार यानी दस नवंबर की शाम को अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य की पूजा की जाती है। वहीं 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य की पूजा के साथ व्रत का समापन होता है।
इस व्रत में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ पूजा को लेकर रविवार को नबीपुर बंबा घाट, अकबरपुर में खरका बंबा घाट तथा रनियां के पातालेश्वर मंदिर में पूजा की तैयारियां की जाती रहीं।
संतान की प्राप्ति व उसकी होती रक्षा
पुरोहितों की मानें तो कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है। शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि की पूजा का विशेष विधान है। कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है। इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है।

सूर्य देव की पूजा करने से संतान की प्राप्ति व उसकी रक्षा होती है। छठ पूजा की शुरुआत विशेष रूप से बिहार और झारखंड से हुई थी। धीरे-धीरे यह पर्व पूरे देश में मनाया जाने लगा। वहीं पर्व को लेकर रविवार को पूरा दिन घाटों पर सफाई का काम चलता रहा।
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