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Kanpur News: प्रधान की गोली मारकर हत्या के मामले में 15 साल मुकदमा लड़कर हुए दोषमुक्त
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कानपुर देहात। शिवली क्षेत्र के भुजपुरा ग्राम प्रधान की करीब 15 वर्ष पूर्व गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक के भाई ने पिता पुत्र सहित पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रही थी। मामले में दो आरोपियों की मुकदमा दौरान मौत हो गई थी। शेष तीन आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त किया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने बताया कि 11 अप्रैल 2008 को भुजपुरा प्रधान मो. मकसूद की करीब 18 किमी दूर लालपुर गांव के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस पर भाई मो. याकूब ने पड़ोसी गांव परसौली के रामगोपाल व उनके पुत्र अजय, सर्वेश, राजू व राजेश पर प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस को दी तहरीर में वादी पक्ष ने पांचों आरोपियों के पास राइफल होने व उसी से हत्या किए जाने की बात कही थी। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश लाल चंद्र गुप्ता की कोर्ट में चल रही थी। दौरान सुनवाई आरोपी राजेश व सर्वेश की मौत हो गई, जिससे पत्रावली से उनके नाम अलग कर दिए गए थे।
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शेष आरोपियों पर मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान वादी ने पांच राइफल से गोली मारने का बयान दिया था, लेकिन मौके से एक ही राइफल बरामद हो सकी। वहीं, मामले के अन्य गवाह भी घटना को साबित नहीं कर सके । गुरुवार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपितों को दोष मुक्त कर दिया।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने बताया कि 11 अप्रैल 2008 को भुजपुरा प्रधान मो. मकसूद की करीब 18 किमी दूर लालपुर गांव के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस पर भाई मो. याकूब ने पड़ोसी गांव परसौली के रामगोपाल व उनके पुत्र अजय, सर्वेश, राजू व राजेश पर प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
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पुलिस को दी तहरीर में वादी पक्ष ने पांचों आरोपियों के पास राइफल होने व उसी से हत्या किए जाने की बात कही थी। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश लाल चंद्र गुप्ता की कोर्ट में चल रही थी। दौरान सुनवाई आरोपी राजेश व सर्वेश की मौत हो गई, जिससे पत्रावली से उनके नाम अलग कर दिए गए थे।
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शेष आरोपियों पर मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान वादी ने पांच राइफल से गोली मारने का बयान दिया था, लेकिन मौके से एक ही राइफल बरामद हो सकी। वहीं, मामले के अन्य गवाह भी घटना को साबित नहीं कर सके । गुरुवार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपितों को दोष मुक्त कर दिया।