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कानपुर: रेमडेसिविर घपले में डॉक्टरों को क्लीन चिट, जिला प्रशासन की तीन सदस्यीय कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट
Thu, 01 Jul 2021 11:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 01 Jul 2021 11:11 PM IST
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रेमडेसिविर दवा
- फोटो : social media
कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन के घपले के मामले में जिला प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी है। इस कमेटी ने भी निलंबित हुए फार्मासिस्ट पर ही घपले का ठीकरा फोड़ा है।
कमेटी ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है। जिलाधिकारी डॉ. आलोक तिवारी ने बताया कि मामले की जांच के लिए सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। एडीएम सिटी अतुल कुमार व सीएमओ डॉॅ. नेपाल सिंह इसके सदस्य थे।
तीनों अधिकारियों ने एक साथ व अलग-अलग जांच की। प्रकरण से संबंधित सभी के बयान दर्ज किए और रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी करने की प्रक्रिया समझी। पाया गया कि फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही की वजह से मरीज की छुट्टी के बाद भी उन्हें इंजेक्शन जारी किए गए।
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इस मामले में मेडिकल कॉलेज की ओर से पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। प्रशासन का मकसद सिर्फ मेडिकल कॉलेज की जांच को क्रॉस चेक करना था। इसमें डॉक्टरों की संलिप्तता सामने नहीं आई।
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कमेटी ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है। जिलाधिकारी डॉ. आलोक तिवारी ने बताया कि मामले की जांच के लिए सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। एडीएम सिटी अतुल कुमार व सीएमओ डॉॅ. नेपाल सिंह इसके सदस्य थे।
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तीनों अधिकारियों ने एक साथ व अलग-अलग जांच की। प्रकरण से संबंधित सभी के बयान दर्ज किए और रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी करने की प्रक्रिया समझी। पाया गया कि फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही की वजह से मरीज की छुट्टी के बाद भी उन्हें इंजेक्शन जारी किए गए।
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इस मामले में मेडिकल कॉलेज की ओर से पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। प्रशासन का मकसद सिर्फ मेडिकल कॉलेज की जांच को क्रॉस चेक करना था। इसमें डॉक्टरों की संलिप्तता सामने नहीं आई।