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कजाकिस्तान में गरजेगी अब कानपुर की कारबाइन
कानपुर/ब्यूरो
Updated Thu, 07 Feb 2013 01:29 PM IST
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छोटे हथियारों के मामले में काफी हद तक दूसरे देशों से सहयोग लेने वाला भारत पहली बार किसी देश में अपने स्मॉल आर्म्स भेज रहा है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि कानपुर की स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री के खाते में आ रही है। यहां से 250 एलएमजी और कारबाइन का कनसाइनमेंट कजाकिस्तान जाएगा। खुद रक्षा मंत्री एके एंटनी अपने दौरे के वक्त इसे सौंपेंगे।
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अधिकृत रूप से हथियारों को डिफेंस कॉरपोरेशन प्रोग्राम के तहत गिफ्ट देने की बात कही जा रही है। मगर चर्चा है कि ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत ये हथियार अभी ट्रायल के लिए दिए जा रहे हैं। आगे इनके बड़े ऑर्डर आ सकते हैं। आम लोगों के लिए रिवाल्वर और आर्मी के लिए अमोघ, इन्सास, मैग, एलएमजी, कारबाइन जैसी गन बनाने वाली स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री को इस माह के अंत तक 9 एमएम की 120 कारबाइन और 130 एलएमजी बनाकर रक्षा मंत्रालय को देनी हैं।
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ये हथियार खासतौर पर कजाकिस्तान के लिए बनाए जा रहे हैं। जिस तरह दक्षिण अफ्रीकी देश को एचएएल एक विमान बतौर गिफ्ट दिया था, उसी तरह हथियारों की यह खेप कजाकिस्तान को दी जाएगी। रक्षामंत्री अपने दौरे के वक्त ये हथियार वहां की सेना को सौंपेंगे। फैक्ट्री के अफसर इसे डिफेंस कॉरपोरेशन प्रोग्राम के तहत होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। मगर सूत्रों की मानें तो भविष्य में कजाकिस्तान के साथ साझा तकनीक समझौते के तहत रक्षा उत्पादन शुरू हो सकता है।
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कुछ समय पहले ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने इस मुद्दे को लेकर ग्लोबल टेंडर भी जारी किया था। ये उसी क्रम में एक पहल है। भारत से जाने वाले ये हथियार ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किए जाएंगे। यदि इन्हें वहां की सेना उपयोगी मानती है तो भविष्य में बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।
कजाकिस्तान के लिए 9 एमएम की 120 कारबाइन और 130 एलएमजी का निर्माण करने के लिए कहा गया है। इनके मूल्य का भुगतान रक्षा मंत्रालय से किया जाएगा।
- पीसी बरनवाल, महाप्रबंधक, स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री