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कानपुर हादसा: एक साथ उठीं अर्थियां…उमड़ा आंसुओं का सैलाब, बच्चों को अंतिम बार देखने के लिए बिलखते रहे मां-बाप

Tue, 15 Oct 2024 12:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 15 Oct 2024 12:12 PM IST
सार

Kanpur News: एक ही मोहल्ले से पांच लोगों की मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया, जहां कल तक दशहरे और दिवाली की खुशियां नजर आ रहीं थीं। उसी मोहल्ले में सोमवार को हर एक की आंख नम थी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि सुबह उनकी आंखों के सामने जो बच्चे हंसते खेलते घर से निकले थे। उन्हीं के शव जा रहे हैं।  

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Kanpur accident, The bodies were taken out together, parents kept crying to see their children for last time
हादसे के मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में भौंती एलिवेटेड हाईवे पर हुए हादसे ने पांच परिवारों का जीवन भर का जख्म दे दिया। हादसे में किसी ने होनहार बेटी खोई, तो किसी के परिवार का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। माता-पिता के साथ भाई-बहनों ने जो सपने देखे थे, वे सभी एक पल में ही चकनाचूर हो गए। इस हादसे ने किसी परिवार के अरमानों को चकनाचूर कर दिया, तो किसी को ऐसा गम दिया जो जीवन भर नहीं भुलाया जा सकता है।

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मंगलवार सुबह पांचों का अंतिम संस्कार एक साथ ड्योढ़ी घाट पर किया गया। घरों से  पांचों की अर्थी जब उठी, तो दिल दहला देने वाला मंजर था। हर तरफ सिर्फ दर्द भरी चीखें सुनाई दे रहीं थीं। प्रतीक, गरिमा और सतीश का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। गरिमा का अंतिम संस्कार दादा के बेटे हर्ष ने किया। वहीं, प्रतीक का अंतिम संस्कार चाचा के बेटे शिवम सिंह और सतीश का बड़े भाई नीतीश द्वारा अंतिम संस्कार किया गया।

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घाट के लिए जाता प्रतीक का शव - फोटो : amar ujala


प्रतीक का शव उठते ही गिर पड़े पिता
पिता राजेश सिंह ने जैसे ही बेटे प्रतीक का शव उठते देखा, तो बेहोश होकर गिर पड़े। पड़ोसी और रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। एक-एक भारी कदम के साथ पिता, बेटे की अर्थी को कांधा देते दिखे। वो अपने लाड़ले बेटे के बिछड़ने की बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे।

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रोती बिलखती गरिमा की मां - फोटो : amar ujala

बदहवास दौड़ी गरिमा की मां, छोटी बहन भी बिलखती रही
देर रात जिन आंखों में आंसू सूखते से लग रहे थे, मंगलवार सुबह बेटी के शव को देखकर मां रीता त्रिपाठी की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अर्थी जैसे उठी, तो मां बदहवास दौड़ पड़ी। छोटी बेटी और अन्य महिलाओं ने उनको संभाला। मां- बेटी दोनों गले लगकर रोती रहीं।

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आयुषी के घर के बाहर लगी भीड़ - फोटो : amar ujala

आयुषी की मां बोली- एक बार आंख खोल दो बेटा
आयुषी की अर्थी उठते ही, मां शव से लिपटकर रोने लगीं। वो बार-बार यही कह रहीं थी कि एक बार आंखे खोल दो बेटा। वहीं, पिता दूर बैठकर बेटी के शव को निहारते रहे। बेटी का शव उठा, तो उनके मुंह से अपनी किस्मत और भगवान को कोसने वाले शब्द निकल पड़े।

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ड्राइवर विजय साहू की बदहवास पत्नी - फोटो : amar ujala

रुआंसे गले से निकली कलेजा कंपा देने वाली चीख
ड्राइवर विजय साहू का पत्नी के रुआंसे गले से निकलने वाली आवाजें चीखों में बदल गईं , जिन्हें सुनने वालों के कलेजे कांप उठे। करवा चौथ से सप्ताह भर पहले सुहाग उजड़ जाने से पत्नी सुमन बदहवास होती रही।  वहीं, दोनों बेटे हिमांशु और शशांक को परिवार के अन्य लोग उन्हें सहारा दे रहे थे। ये नजारा देख सभी के आंखों में आंसू छलक पड़े।

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अंतिम संस्कार में जुटी भीड़ - फोटो : amar ujala

दिवाली से पहले बुझे परिवारों के दीपक
एक ही मोहल्ले से पांच लोगों की मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया, जहां कल तक दशहरे और दिवाली की खुशियां नजर आ रहीं थीं। उसी मोहल्ले में सोमवार को हर एक की आंख नम थी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि सुबह उनकी आंखों के सामने जो बच्चे हंसते खेलते घर से निकले थे। उन्हीं के शव जा रहे हैं।  हर एक की जुबान पर यही चर्चा रही कि दीपावली से पहले ही चारों घरों के दीपक बुझ गए।

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