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kanpur: कारोबार समेट चुकी कंपनी से 18 साल बाद वसूले 50 लाख, बैंक खाते करवाए कुर्क
Thu, 19 May 2022 07:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 19 May 2022 07:38 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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कानपुर में कारोबार बंद करके 18 साल पहले गायब हुई कंपनी पर लाखों की कर वसूली करने में एसजीएसटी विभाग को सफलता मिली है। कंपनी के दिल्ली स्थित बैंक के खातों को सीज करके और एफडी की रकम तुड़वा कर वसूली की गई है। डिप्टी कमिश्नर, कर वसूली धर्मेंद्र बहादुर ने बताया कि माल रोड पर संचालित होने वाली सोमदत्त बिल्डर्स लिमिटेड पर वित्तीय वर्ष 2001-2002, 2002-2003, 2003-2004 का 49.54 लाख बकाया था।
कंपनी पूर्व में व्यापार कर अब एसजीएसटी विभाग कानपुर में पंजीकृत थी। कंपनी शहर से अपना कारोबार बंद कर चुकी थी। वर्तमान में दिल्ली में कारोबार संचालित कर रही थी, लेकिन कंपनी के बारे में किसी प्रकार की अन्य कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई गई और अन्य विभाग से कंपनी के पैन नंबर को पता करवाया गया। इसके बाद पैन नंबर के जरिये कंपनी के खातों का पता करवाया गया।
इस दौरान पता चला कि पिछले महीने कंपनी ने 50 लाख रुपये फिक्स डिपाजिट किए थे। यह एफडी एक्सिस बैंक नई दिल्ली में कराई गई थी। इसके बाद एक्सिस बैंक सिविल लाइंस कानपुर के अफसरों के साथ पत्राचार करके कंपनी का खाता कुर्क करते हुए कर वसूली के निर्देश दिए गए, लेकिन बैंक प्रबंधन ने बैंकिंग नियमों का हवाला देकर एफडी तोड़कर रुपये देने का हवाल देकर मना कर दिया।
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इसके बाद शहर के लीड बैंक मैनेजर के जरिये बैंक के खिलाफ कार्रवाई के पत्र भेजा गया। इसके बाद बैंक ने एफडी खाते को तोड़कर नई दिल्ली स्थित शाखा से रुपये ट्रांसफर करके डिमांड ड्राफ्ट भेजा। उन्होंने बताया कि कंपनी का एक खाता दिल्ली में ही बैंक ऑफ बड़ौदा में कुर्क कराया गया है। जिसमें भी छह लाख की राशि है। जिसे भी जब्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में कंपनी इलाहाबाद हाईकोर्ट से केस हार चुकी है ।
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कंपनी पूर्व में व्यापार कर अब एसजीएसटी विभाग कानपुर में पंजीकृत थी। कंपनी शहर से अपना कारोबार बंद कर चुकी थी। वर्तमान में दिल्ली में कारोबार संचालित कर रही थी, लेकिन कंपनी के बारे में किसी प्रकार की अन्य कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई गई और अन्य विभाग से कंपनी के पैन नंबर को पता करवाया गया। इसके बाद पैन नंबर के जरिये कंपनी के खातों का पता करवाया गया।
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इस दौरान पता चला कि पिछले महीने कंपनी ने 50 लाख रुपये फिक्स डिपाजिट किए थे। यह एफडी एक्सिस बैंक नई दिल्ली में कराई गई थी। इसके बाद एक्सिस बैंक सिविल लाइंस कानपुर के अफसरों के साथ पत्राचार करके कंपनी का खाता कुर्क करते हुए कर वसूली के निर्देश दिए गए, लेकिन बैंक प्रबंधन ने बैंकिंग नियमों का हवाला देकर एफडी तोड़कर रुपये देने का हवाल देकर मना कर दिया।
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इसके बाद शहर के लीड बैंक मैनेजर के जरिये बैंक के खिलाफ कार्रवाई के पत्र भेजा गया। इसके बाद बैंक ने एफडी खाते को तोड़कर नई दिल्ली स्थित शाखा से रुपये ट्रांसफर करके डिमांड ड्राफ्ट भेजा। उन्होंने बताया कि कंपनी का एक खाता दिल्ली में ही बैंक ऑफ बड़ौदा में कुर्क कराया गया है। जिसमें भी छह लाख की राशि है। जिसे भी जब्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में कंपनी इलाहाबाद हाईकोर्ट से केस हार चुकी है ।