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कानपुर: चिड़ियाघर में नौ साल बाद जन्में 25 बटागुर कछुए, 18 से बढ़कर 43 हुई कछुओं की संख्या

Tue, 22 Sep 2026 11:51 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Tue, 22 Sep 2026 11:51 PM IST
सार

 Kanpur News: रेत की मोटी परत संजीवनी बनी। कछुओं की संख्या 18 से बढ़कर 43 हुई। 

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Kanpur: 25 Batagur turtles born at the zoo after nine years
चिड़ियाघर में जन्मे नन्हे कछुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब नौ साल से कानपुर चिड़ियाघर को जिस पल का इंतजार था, वह घड़ी आ गई। दुर्लभ और अत्यंत संकटग्रस्त बटागुर कछुओं के अंडों से 25 बच्चे बाहर आ आए हैं। इन नन्हे कछुओं ने चिड़ियाघर में संरक्षण की उम्मीद को जन्म दिया है। सभी की विशेष निगरानी की जा रही है।
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चिड़ियाघर में 2017 में चंबल से 19 कछुए लाए गए थे। इनमें दो नर और 17 मादा शामिल थीं। बाद में एक नर कछुए को दूसरे चिड़ियाघर भेज दिया गया। यहां मौजूद मादा कछुओं से प्रजनन की उम्मीद तो थी, लेकिन बाड़ों में पर्याप्त रेत न होने से अंडे सुरक्षित तरीके से विकसित नहीं हो रहे थे। पिछले वर्ष समस्या पर ध्यान दिया गया। निदेशक डा. कन्हैया पटेल के निर्देश पर कछुओं के बाड़ों में रेत की मोटी परत बिछाई गई, करीब दो महीने पहले मादा बटागुर कछुओं ने रेत में अंडे दिए। चिड़ियाघर प्रशासन ने अंडों की लगातार निगरानी कराई। मंगलवार को नए बच्चों के जन्म के बाद चिड़ियाघर में बटागुर कछुओं की संख्या 18 से बढ़कर 43 हो गई है। निदेशक डा. कन्हैया पटेल ने बताया कि कछुओं पर नजर रखने के लिए जू कीपर की विशेष ड्यूटी लगाई गई है।
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