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Kanpur: ब्रोंकोस्कोपी से निकाला 150 मिली मवाद, निमोनिया के गंभीर मरीज को मिली नई जिंदगी, ऐसे हुआ था इलाज

Tue, 14 Jul 2026 03:04 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 14 Jul 2026 03:04 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर देहात निवासी घनश्याम (52), जो पिछले एक माह से गंभीर निमोनिया से पीड़ित थे। उनका डॉ. मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में सफल उपचार हुआ। डॉक्टरों की टीम ने ब्रोंकोस्कोपी (दूरबीन विधि) के जरिए उनके फेफड़ों से 150 मिली मवाद निकालकर उन्हें नई जिंदगी दी है।

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Kanpur 150 ml of pus removed via bronchoscopy severe pneumonia patient gets a new lease on life
गंभीर निमोनिया मरीज को मिली नई जिंदगी - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में भीतरगांव निवासी घनश्याम (52), जो पिछले एक माह से फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (निमोनिया) से पीड़ित थे। उन्हें डॉ. मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय के चिकित्सकों ने सफल उपचार देकर राहत दिलाई। कई स्थानों पर इलाज कराने के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार न होने पर वह अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार के पास पहुंचे।

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मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. अवधेश कुमार ने तत्काल भर्ती कर दूरबीन विधि (ब्रोंकोस्कोपी) से जांच की। प्रक्रिया के दौरान फेफड़ों से लगभग 150 मिलीलीटर मवाद और संक्रमित बलगम निकाला गया। लंबे समय तक संक्रमण बने रहने के कारण श्वास नलियों में सूजन और घाव हो गए थे, जिससे प्रक्रिया के दौरान हल्का रक्तस्राव भी हुआ।

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जान बचना मुश्किल हो सकता था
हालांकि, ब्रोंकोस्कोपी के तुरंत बाद मरीज की स्थिति में सुधार देखने को मिला। मरीज घनश्याम ने बताया कि यदि समय पर इस अस्पताल में उपचार नहीं मिलता, तो उनकी जान बचना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने निशुल्क उच्चस्तरीय इलाज उपलब्ध कराने के लिए डॉ. अवधेश कुमार और उनकी पूरी टीम का आभार जताया। विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि यह अत्यंत जटिल मामला था।

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आगे भी जांच जारी है
मरीज के एक्स-रे में पहले की तुलना में काफी सुधार है। ऐसे मामलों में ब्रोंकोन्यूमोनिया, लंग एब्सेस, ब्रॉन्किएक्टेसिस अथवा फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका रहती है। संक्रमण के मूल कारण की पहचान के लिए आगे भी जांच जारी है। उन्होंने बताया कि इस उपचार में रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. शुभम शुक्ला, डॉ. स्मृति, डॉ. अनमोल, डॉ. आलोक तथा ओटी टेक्नीशियन श्याम लाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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