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ये है कन्नौज! यहां वादों से जो मुकरा, सत्ता से हुआ बेदखल
अजय द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 07 Feb 2017 06:45 PM IST
सार
मतदाताओं ने सभी पार्टियों को दिया मौका अब कौन...
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विस्तार
समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज की तिर्वा सीट पर मतदाताओं जाति-धर्म के बंधन के ऊपर उठकर सभी राजनैतिक दलों को काम करने का मौका दिया है। तिर्वा में मतदाताओं से किए वादों से जो मुकरा तो मतदाताओं ने उसे बाहर का रास्ता ही दिखाया है। साल 2017 में एक बार फिर चुनावी बिसात पर सपा, बसपा व भाजपा के प्रत्याशी चुनावी मैदान में है।
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इत्र नगरी कन्नौज की विधान सभाओं में तिर्वा विधान सभा का अलग स्थान है। तिर्वा विधान सभा में सीएम अखिलेश यादव की सीधी निगरानी वाली विधानसभा रही है। यहां पर अरबों रुपये के प्रोजेक्ट रनिंग पोजीशन में है।
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सीएम की पसंदीदा विधानसभा होने के बावजू्द यहां के मतदाताओं के मिजाज को कोई भी राजनैतिक दल भांप नहीं पाया है। जिसने विकास कार्य में ढील दी। मतदाताओं ने उसे अगली बार सत्ता से बाहर का रास्ता ही दिखा दिया। 1993 में सपा के इस गढ़ में सपा से अरविंद प्रताप सिंह जीते थे।
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अरविंद के कार्यो से नखुश मतदाताओं ने 1996 के चुनाव में सपा को किनारे कर भाजपा को काम करने का मौका दिया। भाजपा ने वादा खिलाफी की तो दोबारा सपा को काम करने का मौका 2002 में दिया। सपा मतदाताओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो 2007 के चुनाव में बसपा को मतदाताओं ने काम करने का मौका दिया।
बसपा भी मतदाताओं के मंतव्य भांप नहीं पाई और 2012 के चुनाव में तिर्वा से बाहर हो गई। मतदाताओं ने सपा को एक बार फिर से काम करने का मौका दिया था। सपा ने तिर्वा सीट के इतिहास को ध्यान में रख मतदाताओं के करीब जाने का प्रयास किया। देखना यह है कि सपा का यह प्रयास 2017 के चुनाव में तिर्वा के मतदाताओं को रास आता है या फिर मतदाता एक बार फिर नया इतिहास रचने को तैयार है।
साल विजयी पार्टी
2012 सपा
2009 बसपा
2002 सपा
1996 भाजपा
1993 सपा
1991 जेपी
1989 जेडी
1985 एलकेडी
1980 कांग्रेस
तिर्वा विधानभा के वोटर
कुल मतदाता 346374
पुरुष मतदाता 193380
महिला मतदाता 152994
युवा मतदाता 15581
थर्ड जेंडर 09