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बुंदेलखंड जैसे कम पानी वाले इलाकों में उगेगा 'जनक बीज', 9 साल में हुआ तैयार

Sat, 20 Oct 2018 01:28 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 20 Oct 2018 01:28 PM IST
सार

- बुंदेलखंड सरीखे कम पानी वाले क्षेत्र के लिए मुफीद
- जनक बीज हो गया तैयार, अगली फसल से मिलेगा किसानों को

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Janak Seed ready in 9 years for low water areas like Bundelkhand
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विस्तार

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर ने एक ही बार की सिंचाई में तैयार होने वाला गेहूं तैयार किया है। अमूमन गेहूं की फसल को पांच बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस बीज की फसल सिर्फ एक सिंचाई में तैयार हो जाएगी। इससे बुंदेलखंड समेत दूसरे ऐसे क्षेत्र जहां पानी की कमी रहती है, को फायदा मिलेगा। गेहूं के इस बीज का नाम के-1317 रखा गया है।
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इसका जनक बीज तैयार कर लिया गया है। अगली रबी की फसल में इसे किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। सीएसए के बीज एवं प्रक्षेत्र विभाग के रबी बीज अनुभाग ने गेहूं का बीज तैयार किया है। बीज को विकसित करने में विभाग के विज्ञानियों को 9 साल लगे हैं।
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Janak Seed ready in 9 years for low water areas like Bundelkhand
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निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. सीएल आर्या ने बताया कि गेहूं की फसल की सिंचाई में एक एकड़ में 50 से 60 क्यूबिक मीटर पानी लगता है। एक क्यूबिक मीटर में एक हजार लीटर पानी होता है। गेहूं की फसल पांच सिंचाई लेती है, लेकिन इस बीज की फसल एक सिंचाई में तैयार हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि जनक बीज के बाद आधारित बीज और फिर प्रमाणित बीज तैयार किया जाएगा। डॉ. मौर्या ने बताया कि आधारित और प्रमाणित बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। के-1317 बीज की फसल से अच्छी पैदावार होगी। कम पानी वाले क्षेत्र के लिए यह बहुत मुफीद है।
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