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चपरासी के हवाले केडीए का अस्थायी दफ्तर

Sat, 13 Mar 2021 01:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Mar 2021 01:07 AM IST
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अस्थाई केडीए दफ्तर में मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मी व खाली पड़ी अन्य कुर्सियां। - फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। भवन का ले-आउट, नक्शा आदि स्वीकृत कराने के लिए जिले में ही सुविधा मिलने की दम भरने वाले अफसरों के दावे दस दिन में हवा-हवाई हो गए। एक मार्च को अकबरपुर में खुले केडीए के अस्थायी दफ्तर का जिम्मा चपरासी के ऊपर आ गया है। शुक्रवार को जोनल अधिकारी ने लेकर बाबू तक नदारद मिले। इसके चलते लोग भटकते नजर आए।
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कानपुर विकास प्राधिकरण में अकबरपुर समेत 51 गांव शामिल हैं। व्यक्तिगत या व्यावसायिक किसी भी प्रकार के विकास व निर्माण कार्य के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने को लोग कानपुर के केडीए कार्यालय की भागदौड़ करते। उन्हें सहूलियत देने के लिए केडीए के वीसी राकेश कुमार ने इसी एक मार्च को अकबरपुर के माती रोड पर स्थानीय अभिसूचना इकाई भवन मेें अस्थायी कार्यालय का शुभारंभ किया था। दावा किया था कि तहसीलदार/जोनल अधिकारी अजीत कुमार, सहायक अभियंता सुनील दत्त तिवारी, अवर अभियंता राजेश निरंजन, तीन सुपरवाइजर, लिपिक शिवगोपाल द्विवेदी सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को बैठेंगे। जिससे लोग यहीं पर 500 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क देकर मानचित्र की स्वीकृति करा सकेंगे, लेकिन शुक्रवार को अस्थायी दफ्तर का नजारा देख केडीए वीसी के दावों का पोल खुलती नजर आई। दोपहर 12 बजे कार्यालय में सिर्फ चपरासी शिवसेवक मौजूद मिले। जोनल अधिकारी का कक्ष बंद था। जबकि अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थी। ले-आउट व नक्शा स्वीकृत कराने के लिए पहुंचने वाले चपरासी से जानकारी लेकर बैरंग लौटने को मजबूर रहे। सहायक अभियंता सुनील दत्त तिवारी ने बताया कि कानपुर में केयरटेकर का भी चार्ज है। इसलिए आज अकबरपुर नहीं आ सके। चपरासी के अलावा अन्य कर्मियों का अस्थायी कार्यालय में न जाना, गंभीर बात है। इस बाबत जवाब तलब किया जाएगा।
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केडीए की निष्क्रियता से बिना स्वीकृति हो रहे निर्माण
कागजों पर भले ही अकबरपुर में केडीए का अस्थायी दफ्तर संचालित कर दिया गया हो, लेकिन हकीकत में उपयोगिता साबित नहीं हो पा रही। केडीए के जिम्मेदार अफसरों की निष्क्रियता के कारण अकबरपुर कस्बा, माती समेत आसपास के गांवों में बिना स्वीकृति के ही भवन बनाए जा रहे हैं। इससे जहां केडीए को राजस्व की चपत लग रही। बिना ले-आउट व नक्शा के मनमाने तरीके से भवनों को निर्माण हो रहा।
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