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Kanpur News: नकली सीमेंट की बुनियाद के पीछे प्रभावशाली
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कानपुर। इस्पातनगर में जिस जमीन पर सीमेंट की नकली फैक्टरी चल रही थी, उस जमीन का असली मालिक कौन है, अभी तक पुलिस पता नहीं कर सकी है। शहर में चर्चा है कि जमीन शहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति के परिवार के सदस्य के नाम पर है। इस कारण ही पुलिस की जांच जमीन से कोसों दूर है। पुलिस के सूत्रों ने बताया कि जमीन के मालिका का सही पता तो फैक्टरी संचालक गुप्ता बंधुओं के पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगा। पनकी इंस्पेक्टर दिनेश बिष्ट का कहना है कि आरोपियों के नेपाल में छिपे होने का सुराग लगा है। बाकी रही जमीन के मालिक की बात तो इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
14 अक्तूबर को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की विशेष टीम ने दबिश देकर इस्पातनगर से अदाणी ग्रुप की एसीसी और अंबुजा की नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। फैक्टरी संचालक सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता की चकेरी क्षेत्र में दो फर्में भी हैं। दोनों अदाणी ग्रुप के डिस्ट्रीब्यूटर भी रहे हैं। फैक्टरी में रोजाना एक हजार नकली सीमेंट की बोरियां तैयार की जाती थीं। पुलिस ने फैक्टरी को सील तो कर दिया है लेकिन उसकी जमीन के मालिक का नाम भी दबा दिया है।
इसको लेकर पनकी पुलिस आरोपों के घेरे में है। प्रभावशाली व्यक्ति के विरोधियों का कहना है कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव पड़ रहा है जिस कारण पुलिस जमीन को छोड़कर सिर्फ फैक्टरी संचालकों की तलाश में लगी है। इनको भी इसलिए नहीं पकड़ रही है ताकि जमीन के असली मालिक का नाम दबा रहे। सूत्राें ने बताया कि जिस प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, उसके तार सीएम ग्रिड योजना तक जुड़े हैं। इसी योजना के तहत बनाई जा रही सड़कों में बड़ी मात्रा में नकली सीमेंट खपाई गई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दबी जुबान से इतना ही कहना है कि अभी तक की जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की जमीन होने की बात सामने नहीं आ रही है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जमीन के असली मालिक का पता लगाने के लिए केडीए को पत्र लिखा गया है। जवाब मिलते ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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उपनाम बना पुलिस के गले की फांस
सूत्रों ने बताया कि प्रभावशाली व्यक्ति का उपनाम ही पुलिस के गले की फांस बन गया है। ऐसे में पुलिस भी कदम पीछे खींचकर बैठी है। प्रभावशाली व्यक्ति के विरोधियों का आरोप है कि इतने बड़ा खुलासा करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालना पुलिस की कार्यशैली पर संदेह पैदा कर रहा है।
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14 अक्तूबर को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की विशेष टीम ने दबिश देकर इस्पातनगर से अदाणी ग्रुप की एसीसी और अंबुजा की नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। फैक्टरी संचालक सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता की चकेरी क्षेत्र में दो फर्में भी हैं। दोनों अदाणी ग्रुप के डिस्ट्रीब्यूटर भी रहे हैं। फैक्टरी में रोजाना एक हजार नकली सीमेंट की बोरियां तैयार की जाती थीं। पुलिस ने फैक्टरी को सील तो कर दिया है लेकिन उसकी जमीन के मालिक का नाम भी दबा दिया है।
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इसको लेकर पनकी पुलिस आरोपों के घेरे में है। प्रभावशाली व्यक्ति के विरोधियों का कहना है कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव पड़ रहा है जिस कारण पुलिस जमीन को छोड़कर सिर्फ फैक्टरी संचालकों की तलाश में लगी है। इनको भी इसलिए नहीं पकड़ रही है ताकि जमीन के असली मालिक का नाम दबा रहे। सूत्राें ने बताया कि जिस प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, उसके तार सीएम ग्रिड योजना तक जुड़े हैं। इसी योजना के तहत बनाई जा रही सड़कों में बड़ी मात्रा में नकली सीमेंट खपाई गई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दबी जुबान से इतना ही कहना है कि अभी तक की जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की जमीन होने की बात सामने नहीं आ रही है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जमीन के असली मालिक का पता लगाने के लिए केडीए को पत्र लिखा गया है। जवाब मिलते ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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उपनाम बना पुलिस के गले की फांस
सूत्रों ने बताया कि प्रभावशाली व्यक्ति का उपनाम ही पुलिस के गले की फांस बन गया है। ऐसे में पुलिस भी कदम पीछे खींचकर बैठी है। प्रभावशाली व्यक्ति के विरोधियों का आरोप है कि इतने बड़ा खुलासा करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालना पुलिस की कार्यशैली पर संदेह पैदा कर रहा है।