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Kanpur: इंडियन आइडल विजेता वैभव बोले- बार-बार असफल हुआ तो जागा जीत का जुनून, रियाज ने दिलाई सफलता

Wed, 06 Mar 2024 12:16 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 06 Mar 2024 12:16 AM IST
सार

इंडियन आइडल सीजन-14 के विजेता वैभव गुप्ता आज मुंबई से कानपुर वापस लौटे हैं। इंडियन आइडल-14 के विजेता वैभव गुप्ता ने अमर उजाला कार्यालय में सफलता की कहानी सुनाई।

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Indian Idol winner Vaibhav reached Amar Ujala office
अमर उजाला कार्यालय पहुंचे वैभव गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गायकी में आवाज की रूमानियत और सूफियाना अंदाज की बॉलीवुड को जरूरत है। मेरी सफलता में इसी सूफियाना अंदाज का योगदान है। हालांकि इंडियन आइडल बनने की मेरी ये सफलता रातों-रात में हासिल नहीं हुई। इसके लिए कई सालों की संगीत की साधना और सुरों का रियाज है। वो रियाज, जिसे मैं अपनी हर असफलता के बाद बढ़ाता चला गया। गीत-संगीत की दुनिया में कुछ कर दिखाने का यही जुनून मेरी सफलता का कारण बना। ये कहना है, इंडियन ऑइडल-14 के विजेता वैभव गुप्ता का, जो मंगलवार शाम अपने पिता विष्णु गुप्ता के साथ फजलगंज स्थित अमर उजाला के कार्यालय आए थे।
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मो. रफी साहब के गाने के सुरों को पकड़ने के लिए दो सौ बार सुना
मैं नानकारी, कानपुर का हूं लेकिन मेरी आवाज को सुनने के बाद सभी मुझे राजस्थान का समझ लेते थे। लोग कहते थे आवाज में वही सूफियानापन है, जो राजस्थान या हरियाणा के गायकी में देखने को मिलता है। मैंने गायन बड़े गायकों को सुनकर सीखा है। कई बार गीत के सुरों को साधने में घंटों लग जाते हैं। मो. रफी साहब का गाया गीत अहसान तेरा होगा मुझ पर... के सुरों को सीखने के लिए उस गीत को करीब दो सौ बार से ज्यादा बार गुनगुनाया, तब मन भर गा सका।
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सुखविंदर ने खुद पहनाए जूते तो यकीन नहीं हुआ
जब मैं काफी छोटा था, तब एक बार गायक सुखविंदर सिंह आईआईटी के कार्यक्रम में आए थे, मैं जाना चाहता था लेकिन जा नहीं पाया। उस रात उनके गीतों को मैंने छत पर खड़े हाेकर सुना। उन्हीं सुखविंदर सिंह से जब इंडियन आइडल के सेट पर मुलाकात हुई तो उन्होंने मेना गाना सुनने के बाद मुझे जूते पहनाए, तो यकीन नहीं हुआ कि मेरे आदर्श इस तरह से सम्मानित कर सकते हैं। ऑडिशन में जाने से पहले बाबा आनंदेश्वर का आशीर्वाद लिया था। इनाम में मिली धनराशि से मुंबई में अपना स्टूडियो खोलेंगे। परफार्मेंस देने का अंदाज शशांक दीक्षित से और क्लासिकल गाने की विधा अनंत गुप्ता से सीखी। नए गायकों को चाहिए कि वह तानपुरा का इस्तेमाल रियाज में करें। इसमें कोई एक स्केल लगाकर सा को साधने की कोशिश करें, सा सधगया तो समझो सब सध गया।

26 जनवरी के कार्यक्रम में इस कोने में बैठा था पापा
अमर उजाला कार्यालय आने पर वैभव ने बताया कि जब वह छह साल के थे, तब 26 जनवरी के अवसर पर अमर उजाला कार्यालय में गायन प्रतियोगिता हुई थी। इसमें भाग लेने के लिए वह आए थे। साथ आए पिता और दोस्तों को उस जगह को दिखाते हुए बोले तब उस कार्यक्रम में मैं यहां बैठा था। आज फिर आने का मौका मिला काफी अच्छा लगा।
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