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Kanpur News: भविष्य में डिजिटल व्यवहार से आंकी जाएगी काबिलियत

Fri, 03 Apr 2026 02:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:38 AM IST
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In the Future, Competence Will Be Assessed Based on Digital Behavior
कानपुर। 20वीं शताब्दी में काबिलियत का पैमाना आईक्यू (इंटेलिजेंस क्वोशेंट) था, 21वीं सदी में ईक्यू (इमोशनल क्वोशेंट) की महत्ता बढ़ी लेकिन अब डिजिटल युग में डीक्यू (डिजिटल क्वोशेंट) ही व्यक्ति की क्षमता का प्रमुख मानक बनेगा। डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित उपयोग ही सफलता की कुंजी है। आने वाले समय में व्यक्ति की काबिलियत उसके डिजिटल व्यवहार से भी आंकी जाएगी। यह बातें छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में गुरुवार को आयोजित फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट का अनियंत्रित उपयोग युवाओं की एकाग्रता, मानसिक संतुलन और उत्पादकता के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 20 से 40 प्रतिशत युवा इंटरनेट एडिक्शन के जोखिम में हैं जबकि कुछ अध्ययनों में कॉलेज छात्रों में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत तक पाया गया है। अत्यधिक डिजिटल उपयोग का संबंध अवसाद, चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं से भी पाया गया है।
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डीएम ने कहा कि समय अटेंशन इकॉनमी का है जहां बड़ी तकनीकी कंपनियां उपयोगकर्ताओं का ध्यान बनाए रखने के लिए मनोविज्ञान और तकनीक दोनों का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने जोर दिया कि समाधान तकनीक से दूरी बनाने में नहीं, बल्कि डिजिटल अनुशासन विकसित करने में है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सृजन श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल लत केवल तकनीकी नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक समस्या भी है। कार्यक्रम में पारुल राजोरिया, डॉ. संदीप सिंह, क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रियंका शुक्ला, डॉ. अनमोल श्रीवास्तव, सृजन श्रीवास्तव, दुर्गा यादव और अहमद अब्दुल्ला उपस्थित रहे।
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डिजिटल लत के संकेत


बिना कारण बार-बार मोबाइल चेक करना
थोड़ी देर के लिए फोन खोलकर घंटों ऑनलाइन रहना

पढ़ाई या काम के दौरान ध्यान बार-बार मोबाइल की ओर जाना
मोबाइल दूर होने पर बेचैनी या चिड़चिड़ापन महसूस होना

देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित होना
परिवार और मित्रों के साथ समय कम बिताना
आंखों में जलन, सिरदर्द या गर्दन-पीठ में दर्द की समस्या
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