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Kanpur News: 14 साल में न दफ्तर न कर्मचारी...जमीन भी हवा में
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कानपुर। रमईपुर में मेगा लेदर कलस्टर परियोजना के लिए निवेशकों ने पैसे लगाए तो उनको धोखा ही मिला। आरोपियों ने ठगी का ऐसा जाल बुना कि चेन्नई के उद्यमी सरफराज अख्तर समेत 250 निवेशक बुरी तरह फंस गए। करीब 14 साल पहले शुरू हुए इस परियोजना के लिए उन्होंने पैसा तो लगा दिया। लेकिन, दो साल बीतने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो निवेशकों का माथा ठनका। फिर उन्होंने अपना पैसा मांगना शुरू किया। जब आरोपियों ने आनाकानी की तो निवेशकों ने खुद पड़ताल की तब जाकर धोखाधड़ी सामने आई।
निवेशकों ने लगाया आरोप... सरकार से भी धोखाधड़ी, 40 लाख तक का निवेश
निवेशकों का कहना है कि भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के तहत 32 करोड़ लेने वाले आरोपियों ने सरकार से भी धोखाधड़ी की। परियोजना के तहत निवेशकों को सब्सिडी प्रदान की गई थी। इसके बदले में सिर्फ सात लोगों को शेयर होल्डर बनाया गया और बाकी निवेशकों को डिपाॅजिटर बना दिया गया। निवेशकों ने बताया कि परियोजना अच्छी थी, इसलिए छोटे से लेकर बड़े टेनरी संचालकों ने परियोजना में निवेश करना उचित समझा। तकरीबन 250 लोगों के निवेश की रकम दो से लेकर 40 लाख रुपये तक रही।
शहर आए तो मुकदमे में फंसा दूंगा, आरोप...स्थानीय पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
निवेशकों ने तहरीर में सभी आरोपियों को टेनरी संचालक और उद्यमी बताया है। निवेशकों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने रकम वापस मांगी तो आरोपी शहर आने पर फर्जी मुकदमे में फंसा देने की धमकी देते थे। उन्होंने स्थानीय पुलिस से शिकायत की तो सुनवाई नहीं हुई। फिर वह पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे। वहीं, जाजमऊ थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि सात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व फर्जी प्रपत्र तैयार करने सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। जांच कर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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55 एकड़ जमीन पर लगाई जानीं थीं टेनरियां, चमड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण
शहर के चमड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर परियोजना करीब 14 साल पहले शुरू हुई थी। स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया गया था। 235 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले क्लस्टर में 55 एकड़ जमीन पर टेनरियां लगाने का प्रस्ताव था। इसके अलावा करीब 30 फीसदी क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी थी। यहां 20 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट भी प्रस्तावित था। ये परियोजना कई बार अटक चुकी है। अब यूपीसीडा इस प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है।
परियोजना से सालाना 13 से 15 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया गया था। 451 करोड़ रुपये की इस योजना में केंद्र सरकार से 125 करोड़ रुपये की सहायता मिलनी थी। केंद्र की मंजूरी के बाद एसपीवी के प्रमोटरों ने जमीनों की अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन करीब 27 एकड़ जमीन का मामला पूरा नहीं हो सका। बीच में जमीनों की अदला-बदली में गड़बड़ी मिलने पर जिला प्रशासन ने एसपीवी रद्द कर दिया था। इसके चलते परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी। हालांकि कुछ समय पहले चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने सीएम मुलाकात के दौरान रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर का मुद्दा उठाया गया था। मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला यूपीसीडा को भेजे जाने के बाद अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना में करीब छह हजार करोड़ रुपये का निवेश आने के साथ ही 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग डेढ़ लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
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निवेशकों ने लगाया आरोप... सरकार से भी धोखाधड़ी, 40 लाख तक का निवेश
निवेशकों का कहना है कि भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के तहत 32 करोड़ लेने वाले आरोपियों ने सरकार से भी धोखाधड़ी की। परियोजना के तहत निवेशकों को सब्सिडी प्रदान की गई थी। इसके बदले में सिर्फ सात लोगों को शेयर होल्डर बनाया गया और बाकी निवेशकों को डिपाॅजिटर बना दिया गया। निवेशकों ने बताया कि परियोजना अच्छी थी, इसलिए छोटे से लेकर बड़े टेनरी संचालकों ने परियोजना में निवेश करना उचित समझा। तकरीबन 250 लोगों के निवेश की रकम दो से लेकर 40 लाख रुपये तक रही।
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शहर आए तो मुकदमे में फंसा दूंगा, आरोप...स्थानीय पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
निवेशकों ने तहरीर में सभी आरोपियों को टेनरी संचालक और उद्यमी बताया है। निवेशकों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने रकम वापस मांगी तो आरोपी शहर आने पर फर्जी मुकदमे में फंसा देने की धमकी देते थे। उन्होंने स्थानीय पुलिस से शिकायत की तो सुनवाई नहीं हुई। फिर वह पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे। वहीं, जाजमऊ थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि सात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व फर्जी प्रपत्र तैयार करने सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। जांच कर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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55 एकड़ जमीन पर लगाई जानीं थीं टेनरियां, चमड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण
शहर के चमड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर परियोजना करीब 14 साल पहले शुरू हुई थी। स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया गया था। 235 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले क्लस्टर में 55 एकड़ जमीन पर टेनरियां लगाने का प्रस्ताव था। इसके अलावा करीब 30 फीसदी क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी थी। यहां 20 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट भी प्रस्तावित था। ये परियोजना कई बार अटक चुकी है। अब यूपीसीडा इस प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है।
परियोजना से सालाना 13 से 15 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया गया था। 451 करोड़ रुपये की इस योजना में केंद्र सरकार से 125 करोड़ रुपये की सहायता मिलनी थी। केंद्र की मंजूरी के बाद एसपीवी के प्रमोटरों ने जमीनों की अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन करीब 27 एकड़ जमीन का मामला पूरा नहीं हो सका। बीच में जमीनों की अदला-बदली में गड़बड़ी मिलने पर जिला प्रशासन ने एसपीवी रद्द कर दिया था। इसके चलते परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी। हालांकि कुछ समय पहले चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने सीएम मुलाकात के दौरान रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर का मुद्दा उठाया गया था। मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला यूपीसीडा को भेजे जाने के बाद अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना में करीब छह हजार करोड़ रुपये का निवेश आने के साथ ही 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग डेढ़ लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई थी।