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Kanpur News: आईएमए जनता से फिर जोड़ेगा संवाद, ओपीडी होगी सक्रिय
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कानपुर। पिछले एक वर्ष में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का आम जनता से संपर्क टूट गया था। मीडिया के माध्यम से भी लोगों से संवाद नहीं हो पा रहा था। अब नई ऊर्जावान कार्यकारिणी जनहित में काम करते हुए डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास बहाल करेगी। बृहस्पतिवार को पदभार संभालने के बाद आयोजित स्वस्थ संवाद कार्यक्रम में नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह गौर और सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने ये बातें कहीं।
उन्होंने स्वीकार किया कि संवादहीनता के कारण डॉक्टरों और मरीजों के रिश्तों में दूरियां बढ़ी हैं। विश्वास बहाली के लिए आईएमए की लगभग सुस्त पड़ी ओपीडी का संचालन व्यवस्थित किया जाएगा और इसका प्रचार-प्रसार भी होगा, ताकि जरूरतमंद मरीज इसका लाभ उठा सकें। पदाधिकारियों ने महंगे इलाज और मोनोपोली वाली दवाओं के मुद्दे पर कहा कि बेवजह डॉक्टरों को बदनाम किया जाता है। दवाओं के दाम बढ़ाने में मैन्युफैक्चरर की भूमिका होती है और कीमतों पर नियंत्रण सरकार के अधीन है। ऐसे में डॉक्टरों पर लांछन लगाना गलत है।
सुधार के लिए कई बड़े ऐलान
आईएमए डॉक्टरों के साथ बैठक कर पर्चे पर न्यूनतम ब्रांड वाली दवाएं लिखने की अपील करेगा ताकि मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो। अस्पतालों में क्लीनिकल गवर्नेंस की सख्त जरूरत पर जोर दिया गया। जनता के लिए विशेष ओपीडी कैंप लगाए जाएंगे और डॉक्टर और अस्पताल को पहचानो अभियान चलाया जाएगा। आईएमए ने मिक्सोपैथी का विरोध जारी रखने की बात भी कही। वहीं झोलाछाप संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी जिससे मरीजों का इलाज केवल वैध और योग्य लोगों से सुनिश्चित किया जा सके।
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उन्होंने स्वीकार किया कि संवादहीनता के कारण डॉक्टरों और मरीजों के रिश्तों में दूरियां बढ़ी हैं। विश्वास बहाली के लिए आईएमए की लगभग सुस्त पड़ी ओपीडी का संचालन व्यवस्थित किया जाएगा और इसका प्रचार-प्रसार भी होगा, ताकि जरूरतमंद मरीज इसका लाभ उठा सकें। पदाधिकारियों ने महंगे इलाज और मोनोपोली वाली दवाओं के मुद्दे पर कहा कि बेवजह डॉक्टरों को बदनाम किया जाता है। दवाओं के दाम बढ़ाने में मैन्युफैक्चरर की भूमिका होती है और कीमतों पर नियंत्रण सरकार के अधीन है। ऐसे में डॉक्टरों पर लांछन लगाना गलत है।
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सुधार के लिए कई बड़े ऐलान
आईएमए डॉक्टरों के साथ बैठक कर पर्चे पर न्यूनतम ब्रांड वाली दवाएं लिखने की अपील करेगा ताकि मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो। अस्पतालों में क्लीनिकल गवर्नेंस की सख्त जरूरत पर जोर दिया गया। जनता के लिए विशेष ओपीडी कैंप लगाए जाएंगे और डॉक्टर और अस्पताल को पहचानो अभियान चलाया जाएगा। आईएमए ने मिक्सोपैथी का विरोध जारी रखने की बात भी कही। वहीं झोलाछाप संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी जिससे मरीजों का इलाज केवल वैध और योग्य लोगों से सुनिश्चित किया जा सके।
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