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जानें, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल पाने वाले ‘आईआईटीयन्स के विचार’

Fri, 16 Jun 2017 09:24 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 16 Jun 2017 09:24 AM IST
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पल्लव
कानपुर आईआईटी से मैथमेटिक्स एंड साइंटिफिक कंप्यूटिंग से चार वर्षीय बीटेक करने वाले पल्लव गोयल को संयुक्त रूप से डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल से नवाजा गया। मां शीला गोयल और बहन डॉ. पारूल गोयल भी इस शानदार पल की साक्षी बनीं। पिता जय प्रकाश गोयल छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्टील और आयरन का बिजनेस करते हैं।
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पल्लव बताते हैं कि वह फिलहाल नौकरी नहीं करेंगे। इसलिए वह प्लेसमेंट में भी शामिल नहीं हुए। पीएचडी करने के लिए पल्लव यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो जा रहे हैं। पल्लव की मां शीला बताती हैं कि पल्लव मैथ्स में बचपन से ही तेज था।
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मौका मिला तो आईआईटी में बनूंगा प्रोफेसर
पल्लव कहते हैं कि पीएचडी करने के बाद देश में ही रहकर एकेडमिक क्षेत्र में काम करूंगा। अगर मौका मिला तो सबसे पहले आईआईटी कानपुर में ही प्रोफेसर बनूंगा। पल्लव ने 2013 में जेईई क्वालीफाई किया था। उस वक्त उनकी रैंकिंग 660 थी।  
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प्रेसिडेंट मेडल पाकर मां से लिपटा संसित

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संसित
कानपुर आईआईटी के ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल हासिल करने वाले संसित पटनायक भुवनेश्वर के रहने वाले हैं। पिता विष्णुपद पटनायक की मौत के बाद मां सबिता बाला पटनायक ने ही संसित को पढ़ाया-लिखाया। सबिता ईस्टर्न मीडिया लिमिटेड में कार्यरत हैं। संसित मेडल मिलने के बाद मां से लिपट गए।

मेडल मिलने की खुशी दोनों के चेहरे पर साफ दिख रही थी। संसित का छोटा भाई शोभित पटनायक आईआईटी खड़गपुर से बीटेक कर रहा है। मां सबिता को हिंदी नहीं आती। टूटे-फूटे शब्दों में ही बेटे की तारीफ कीं। बोलीं संसित शुरू पढ़ने में तेज था। उसने बोला था कि वह कुछ करके दिखाएगा और उसके कर दिखाया। संसित ने 2010 में संसित ने 10 सीजीपीए अंकों के साथ हाईस्कूल और 2012 में 94.4 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद यहां मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। बीटेक में संसित का सीपीआई स्कोर 9.89 है। बीटेक के दौरान ही संसित की नौकरी आईटीसी में टेक्निकल मैनेजर के पद पर लग गई। इसी माह वह ज्वाइन भी करेंगे। 

मेरे दोस्त कहते थे तुम्हें मिलेगा मेडल
संसित ने मेडल मिलने की खुशी जाहिर की। बोले, मेरे दोस्त शुरू से ही कहते थे कि तुम्हें ही प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल मिलेगा। संसित ने इसका पूरा श्रेय अपने दोस्तों और शिक्षकों को दिया। बोले, मुझे पढ़ाई के दौरान प्रो. एनएस यादव, प्रो. सुमित बासु, प्रो. एमके दास, प्रो. वेंकट नारायण ने काफी मदद की।
 

नोवनीत ने हासिल किया नया मुकाम

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नवनीत
संयुक्त रूप से डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल हासिल करने वाले नोवनीत कश्यप अपनी जिंदगी की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। नोवनीत की ओपेरा सॉल्यूशंस नोएडा में शानदार नौकरी लग गई है। इसी माह वह ज्वाइन कर लेंगे। मूल रूप से नोवनीत गुवाहाटी के रहने वाले हैं। पिता रंजीत गोस्वामी एसबीआई बैंक से रिटायर्ड हुए हैं। मां सुब्रता गोस्वामी गृहिणीं हैं।

नोवनीत बताते हैं कि फिलहाल वह अच्छे से नौकरी करेंगे। कहते हैं कि वह गरीब बच्चे को पढ़ाना चाहते हैं। इसलिए अपनी आय से कुछ धनराशि गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए भी देंगे। नोवनीत ने 2012 में 97.2 और 2010 में 10 सीजीपीए अंकों के साथ स्कूली पढ़ाई पूरी की थी। यहां उन्होंने ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम में दाखिला लिया था। बीटेक में 9 सीपीआई और एमटेक में 9.7 सीपीआई हासिल किया।

कला के माहिर हैं नोवनीत
नोवनीत कला का भी शौख रखते हैं। वह आईआईटी के फाइन आर्ट्स क्लब के प्रेसिडेंट भी थे। नोवनीत बताते हैं कि कला ने उन्हें जिंदगी में बहुत कुछ दिया। वह इसे आगे भी जारी रखेंगे। 

ऋचा को मिला रतन स्वरूप मेमोरियल प्राइज

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ऋचा अग्रवाल
कानपुर आईआईटी के दीक्षांत समारोह में मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग से चार/पांच वर्षीय बीटेक करने वाली ऋचा अग्रवाल को रतन स्वरूप मेमोरियल प्राइज से सम्मानित किया गया। ऋचा मूल रूप से बनारस के रविंद्र पुरी कॉलोनी की रहने हैं।

पिता डॉ. राजेश अग्रवाल और मां डॉ. ज्योति अग्रवाल दोनों ही डेंटल सर्जन हैं। छोटी बहन अपूर्वा ने इसी साल दिल्ली यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई पूरी की है। ऋचा ने बताया कि पढ़ाई के दौरान हुए कैंपस सलेक्शन में उन्हें ऑक्टस एडवायजरी कंसल्टिंग कंपनी ने जॉब ऑफर की थी। उसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। जल्द ही वह गुरगांव में ज्वाइन भी कर लेंगी।

थियेटर का शौक जारी रखेंगे
ऋचा कहती हैं कि उन्हें थियेटर का शौक है। वह आईआईटी की थियेटर क्लब से भी जुड़ी रही हैं। इसे आगे भी जारी रखेंगी। ऋचा ने डीपीएस वाराणसी से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की है। 12 वीं में उनके 96.8 अंक थे।
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