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Kanpur News: आईआईटी कानपुर का रेनोइर टूल समझेगा कोशिकाओं की बातचीत
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कानपुर। कोशिकाओं की बातचीत को समझने के लिए आईआईटी कानपुर के बायोसाइंस एंड बायोइंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक प्रो. हमीम जफर ने नया कंप्यूटेशनल टूल रेनोइर तैयार किया है। इससे कैंसर जैसी बीमारियों की प्रगति और शरीर के अंगों के विकास से जुड़े छिपे संकेतों को समझना आसान होगा।
यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित हुआ है। इसे ऑस्ट्रेलिया के गार्वन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर विकसित किया गया है। अध्ययन में भ्रूणीय लिवर और लिवर कैंसर से जुड़े डेटा का उपयोग कर इस तकनीक की प्रभावशीलता को परखा गया। हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाएं लगातार एक-दूसरे को संकेत (सिग्नल) भेजती रहती हैं। यही संकेत तय करते हैं कि शरीर का विकास कैसे होगा, रोग कैसे बढ़ेगा और प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे काम करेगी। हालांकि अब तक यह समझना कठिन था कि ये संकेत अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।
रेनोइर इसी चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है। यह टूल आधुनिक स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स तकनीक पर आधारित है जो यह बताती है कि शरीर के किस हिस्से में कौन-सी कोशिका सक्रिय है और क्या कार्य कर रही है। रेनोइर न केवल कोशिकाओं के बीच संवाद को पहचानता है बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि इन संकेतों का प्रभाव किन जीनों पर और किस स्थान पर पड़ रहा है। इससे वैज्ञानिकों को शरीर के उन विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है जहां बीमारी या विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां चल रही होती हैं।
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प्रो. हमीम जफर के अनुसार इस टूल से अब यह पता लगाना आसान होगा कि कैंसर में कौन से सिग्नल बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। इस तकनीक से भविष्य में कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों के अधिक सटीक और प्रभावी इलाज विकसित करने में मदद मिलेगी। टूल का नाम प्रसिद्ध चित्रकार रेनोइर के नाम पर रखा गया है क्योंकि यह कोशिकीय गतिविधियों को एक स्पष्ट चित्र की तरह प्रस्तुत करता है।
यह सॉफ्टवेयर दुनिया भर के शोध वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध है। इससे कैंसर रिसर्च, अंगों के विकास और प्रिसीजन मेडिसिन के क्षेत्र में नई खोजों को गति मिलने की उम्मीद है।
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यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित हुआ है। इसे ऑस्ट्रेलिया के गार्वन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर विकसित किया गया है। अध्ययन में भ्रूणीय लिवर और लिवर कैंसर से जुड़े डेटा का उपयोग कर इस तकनीक की प्रभावशीलता को परखा गया। हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाएं लगातार एक-दूसरे को संकेत (सिग्नल) भेजती रहती हैं। यही संकेत तय करते हैं कि शरीर का विकास कैसे होगा, रोग कैसे बढ़ेगा और प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे काम करेगी। हालांकि अब तक यह समझना कठिन था कि ये संकेत अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।
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रेनोइर इसी चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है। यह टूल आधुनिक स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स तकनीक पर आधारित है जो यह बताती है कि शरीर के किस हिस्से में कौन-सी कोशिका सक्रिय है और क्या कार्य कर रही है। रेनोइर न केवल कोशिकाओं के बीच संवाद को पहचानता है बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि इन संकेतों का प्रभाव किन जीनों पर और किस स्थान पर पड़ रहा है। इससे वैज्ञानिकों को शरीर के उन विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है जहां बीमारी या विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां चल रही होती हैं।
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प्रो. हमीम जफर के अनुसार इस टूल से अब यह पता लगाना आसान होगा कि कैंसर में कौन से सिग्नल बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। इस तकनीक से भविष्य में कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों के अधिक सटीक और प्रभावी इलाज विकसित करने में मदद मिलेगी। टूल का नाम प्रसिद्ध चित्रकार रेनोइर के नाम पर रखा गया है क्योंकि यह कोशिकीय गतिविधियों को एक स्पष्ट चित्र की तरह प्रस्तुत करता है।
यह सॉफ्टवेयर दुनिया भर के शोध वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध है। इससे कैंसर रिसर्च, अंगों के विकास और प्रिसीजन मेडिसिन के क्षेत्र में नई खोजों को गति मिलने की उम्मीद है।