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Kanpur News: पांच करोड़ मिले तो 430 रोजगार सेवकों का हो भुगतान

Mon, 25 May 2026 01:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 25 May 2026 01:15 AM IST
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If five crore rupees are received, then 430 employment servants should be paid.
कानपुर देहात। मनरेगा (वीबी जीरामजी) में रोजगार सेवकों को वर्ष 2020-21 से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। पांच करोड से अधिक का बकाया है। कई दूसरा काम करने को मजबूर हैं तो कई को दूसरे रोजगार की तलाश है। इधर मनरेगा के काम अटके पड़े हैं।
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जिले के 10 विकास खंडों में 430 रोजगार सेवक तैनात हैं। इनको मिलने वाला मानदेय वर्ष 2020-21 से वर्ष 2025-26 तक का भुगतान नहीं किया गया है। आर्थिक तंगी से गुजर रहे रोजगार सेवक समय-समय पर मानदेय का भुगतान किए जाने के लिए आवाज उठाते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। विभाग के आंकड़ों की माने तो इन रोजगार सेवकों का 5,02,24,914 रुपया मानदेय बाकी है। इसमें सबसे अधिक अकबरपुर के 43 रोजगार सेवकों का 70,01,412 रुपये बकाया है। रोजगार सेवकों का कहना है कि मानदेय न मिलने से इनको परिवार के पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अब दूसरे कामों की तरफ रुख करना मजबूरी हो गया है।
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केंद्र सरकार ने मनरेगा को वीबी जी रामजी योजना के रूप में परिवर्तित किया है। इसकी नई गाइडलाइन आना अभी बाकी है। फिलहाल अभी मनरेगा योजना ही चल रही है। वर्तमान में योजना के अधिकतर काम बंद हैं। सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना और तालाबों की खोदाई का काम चल रहा है। एक तरफ जहां रोजगार सेवकों को मानदेय नहीं मिल रहा है, वहीं मनरेगा के तहत कार्य करने वाले श्रमिकों का भुगतान अटका हुआ है। इन श्रमिकों से रोजगार सेवक ही कार्य कराते हैं, लेकिन भुगतान मिलने में हो रही हीलाहवाली की वजह से यह योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं।
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बयान
परिवार के पालन-पोषण की बड़ी समस्या
जिले में कार्यरत रोजगार सेवकों के मानदेय का भुगतान न होने से सभी के सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या सामने आ रही है। विभाग से कई बार रुके मानदेय का भुगतान किए जाने के लिए अपील की गई, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। - हरिमोहन सिंह, अध्यक्ष, रोजगार सेवक संगठन
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पांच साल से कर रहे इंतजार, अब टूट रहा सब्र
वर्ष 2020-21 से वर्ष 2025-26 तक रोजगार सेवकों का मानदेय रुका हुआ है। एक तरफ शासन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मनरेगा के तहत काम मुहैया कराए जाने की बात करता है, लेकिन जब मानदेय ही नहीं मिलेगा तो वह कैसे आत्मनिर्भर बनेगा। अब सभी का सब्र टूट रहा है। - सुरेंद्र कुमार पाल, महामंत्री, रोजगार सेवक संगठन

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बयान
लंबित मानदेय की मांग शासन से की गई है। शासन से स्वीकृति के बाद डीबीटी के माध्यम से संबंधित के खाते में धनराशि का अंतरण स्वयं ही हो जाएगा। - अशोक कुमार, उपायुक्त, मनरेगा
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विकासखंड वार स्थिति
ब्लॉक - रोजगार सेवक - रुका मानदेय
अकबरपुर- 43 - 7001412
अमरौधा - 53 - 5333058
डेरापुर- 38 - 4135692
झींझक - 26 - 4167636
मैथा - 45 - 6553464
मलासा- 34 - 4633200
राजपुर - 44 - 4091472
रसूलाबाद - 66 - 6962472
संदलपुर - 38 - 3218868
सरवनखेड़ा - 43 - 4127640
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