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कानपुर आती रहती हूं पर एनएसआई का नाम नहीं सुना : राज्यपाल
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कानपुर। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) के 91वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि वह कानपुर तो 10 बार आईं हैं लेकिन एनएसआई का नाम नहीं सुना। 90 साल पुराना इंस्टीट्यूट है, देश-विदेश में नाम है तो उन्हें भी पता चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कानपुर आने पर एनएसआई भी आएंगी। समारोह में सम्मानित होने वालों में किसी महिला का नाम न होने पर भी उन्होंने एतराज जताया।
स्थापना दिवस समारोह को राज्यपाल ने राजभवन से ऑनलाइन बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी, उद्यम के कार्य करने वालों में 50 फीसदी महिलाएं हैं, इंस्टीट्यूट की निदेशक भी महिला हैं, फिर भी किसानों और पूर्व छात्रों की सूची में कोई महिला नहीं। शोध करने वाली छात्राओं का सम्मान भी होना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं के नशा करने आदत पर गहरी चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा कि एनएसआई इथेनॉल बनाने के साथ स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ बनाएं। समारोह में 13 प्रगतिशील किसानों और सात पुरातन छात्रों को सम्मानित किया गया। इस निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने इंस्टीट्यूट की उपलब्धियों को बताया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार्टर 2.0 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चीनी मिलों में भूगर्भ जल की खपत कम किए जाने और प्रदूषण कम करने संबंधी नियमों की जानकारी दी गई। सांसद रमेश अवस्थी, विधायक नीलिमा कटियार ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत तथा अन्य मीडिया प्रभारी मिहिर मंडल, तकनीकी अधिकारी ब्रजेश सिंह, अखिलेश कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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सात को मिला शर्कराश्री सम्मान
पुरातन छात्र एवं उद्यमी : योगेश कुमार सिंह, बृज मोहन, डॉ. अशोक कुमार, आर नंदा कुमार, केके बाजपेई, राजीव नयन ठाकुर और वी. सुब्बु रथीनाम।
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सम्मानित 13 प्रगतिशील किसान:
-अटल कुमार मिश्रा (लखीमपुर), कौशल कुमार मिश्रा (शाहजहांपुर), बिंजू यादव और शैलेंद्र कुमार (चंपारण), संजीव वालिया (यमुनानगर), कुलदीप सिंह (कुरुक्षेत्र), बसप्पा यलागॉन, रमेश अवन्ना अवाती और महावीर पाटिल (कर्नाटक), उपेंद्र कौरव और रामेश्वर पटेल (मध्य प्रदेश), भोला शंकर सिंह और सुनील जलाक्सो (छत्तीसगढ़)।
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स्थापना दिवस समारोह को राज्यपाल ने राजभवन से ऑनलाइन बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी, उद्यम के कार्य करने वालों में 50 फीसदी महिलाएं हैं, इंस्टीट्यूट की निदेशक भी महिला हैं, फिर भी किसानों और पूर्व छात्रों की सूची में कोई महिला नहीं। शोध करने वाली छात्राओं का सम्मान भी होना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं के नशा करने आदत पर गहरी चिंता जाहिर की।
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उन्होंने कहा कि एनएसआई इथेनॉल बनाने के साथ स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ बनाएं। समारोह में 13 प्रगतिशील किसानों और सात पुरातन छात्रों को सम्मानित किया गया। इस निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने इंस्टीट्यूट की उपलब्धियों को बताया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार्टर 2.0 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चीनी मिलों में भूगर्भ जल की खपत कम किए जाने और प्रदूषण कम करने संबंधी नियमों की जानकारी दी गई। सांसद रमेश अवस्थी, विधायक नीलिमा कटियार ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत तथा अन्य मीडिया प्रभारी मिहिर मंडल, तकनीकी अधिकारी ब्रजेश सिंह, अखिलेश कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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सात को मिला शर्कराश्री सम्मान
पुरातन छात्र एवं उद्यमी : योगेश कुमार सिंह, बृज मोहन, डॉ. अशोक कुमार, आर नंदा कुमार, केके बाजपेई, राजीव नयन ठाकुर और वी. सुब्बु रथीनाम।
सम्मानित 13 प्रगतिशील किसान:
-अटल कुमार मिश्रा (लखीमपुर), कौशल कुमार मिश्रा (शाहजहांपुर), बिंजू यादव और शैलेंद्र कुमार (चंपारण), संजीव वालिया (यमुनानगर), कुलदीप सिंह (कुरुक्षेत्र), बसप्पा यलागॉन, रमेश अवन्ना अवाती और महावीर पाटिल (कर्नाटक), उपेंद्र कौरव और रामेश्वर पटेल (मध्य प्रदेश), भोला शंकर सिंह और सुनील जलाक्सो (छत्तीसगढ़)।