फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Historical Radha-Krishna temple collapse case

ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर ढहने का मामला: करीब डेढ़ सौ साल पुराना था मंदिर, 90 के दशक से पड़ा था ताला

Mon, 24 May 2021 10:21 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 24 May 2021 10:21 AM IST
सार

तलाक महल के पास बना कई दशक पुराना राधा-कृष्ण का मंदिर ढह गया। मंदिर कैसे और क्यों गिरा जांच में यह बात साफ नहीं हो पाई है। मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना बताया जा रहा है।

विज्ञापन
Historical Radha-Krishna temple collapse case
राधा-कृष्ण मंदिर ढहा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में तलाक महल के पास प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर के ढहने के मामले में पुलिस को अभी तक किसी तरह की साजिश के सुबूत नहीं मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हुआ है कि मंदिर जर्जर होने की वजह से खुद ही ढह गया। मंदिर तीन दशकों से बंद पड़ा था।
विज्ञापन


इसके पीछे की एक बड़ी वजह थी। मंदिर जिस जमीन पर बना था उसके मालिक ने बातचीत में पूरी जानकारी दी। मंदिर के मालिक आजाद नगर निवासी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। मंदिर उनकी पुश्तैनी जमीन पर था।
विज्ञापन


अनिल बताते हैं कि सन 1931 में कानपुर में दंगे हुए थे।  तब उनका पूरा परिवार बजरिया से पलायन कर आजाद नगर चला गया था। दंगे के बाद पुश्तैनी मकान वीरान हो गया था। मगर मंदिर खुला था। 1994 में जब उन्होंने मंदिर की मरम्मत कराने का प्रयास किया तो वहां पर चाय की दुकान लगाने वाले यासीन ने खुद को किरायेदार बता इसका विरोध किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसने मंदिर के सामने कब्जा कर रखा था। कोर्ट में परिवाद भी दाखिल कर दिया। अनिल ने बताया कि केस की वजह से मंदिर की मरम्मत नहीं कराई जा सकी थी। इसलिए वो जर्जर होता चला गया और ढह गया। विवाद की वजह से मंदिर में आज तक ताला लटका हुआ था। 


32 मंदिर खत्म हो गए, जमीनें कब्जा ली गईं
अनिल कुमार ने बताया कि उनका बड़ा खानदान है। सुखईलाला चौराहा उनके ही परिवार के सदस्य के नाम पर है। उन्होंने बताया कि एक समय था जब बजरिया समेत आसपास क्षेत्र में 32 मंदिर हुआ करते थे। जिनकी देखरेख उनके ही परिवार वाले करते थे। मगर दंगों के बाद जैसे जैसे समय गुजरा मंदिर खत्म होते गए। अधिकतर मंदिरों की जमीन पर कब्जे हो गए। आज उनका नामोनिशान तक मिट गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed