{"_id":"5f3ecb182a0879369c36787e","slug":"hardoi-life-imprisonment-for-three-including-father-and-son-in-murder","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरदोई: हत्या में पिता-पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास, साढ़े सात साल बाद आया फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरदोई: हत्या में पिता-पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास, साढ़े सात साल बाद आया फैसला
Fri, 21 Aug 2020 11:54 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 21 Aug 2020 11:54 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट ने सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हरदोई में साढ़े सात वर्ष पहले हुई युवक की हत्या में अपर जिला जज संगीता कुमारी ने पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 41-41 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक वीरेश कुमार सिंह ने बताया कि माधौगंज थाना क्षेत्र के ग्राम डकौली निवासी अवधेश कुमार के पुत्र अश्वनी उर्फ दीपू को 19 जनवरी 2013 को गांव का ही अंकित उर्फ कौशल किशोर अपने साथ ले गया था।
अश्वनी और अंकित के बीच गहरी दोस्ती थी। इसके बाद अश्वनी घर नहीं लौटा। परिजनों ने गुमशुदगी की सूचना थाने में दी। 21 जनवरी 2013 को अश्वनी का शव गांव में ही लालता प्रसाद के गन्ने के खेत में आम के पेड़ से फांसी पर लटकता मिला। गन्ने के खेत में प्लास्टिक के कुछ गिलास और शराब की बोतलें भी मिली थीं।
मृतक के पिता अवधेश ने पंचायत चुनाव की रंजिश में गांव के ही रामचंद्र व राकेश पुत्रगण होरीलाल और रामचंद्र के पुत्र कौशल किशोर उर्फ अंकित पर हत्या करने का आरोप लगाया था। थाने में तहरीर देने पर उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अवधेश ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। पांच अप्रैल 2013 को न्यायालय ने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए।
विज्ञापन
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर 26 मई 2013 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इस पर अवधेश ने न्यायालय में आपत्ति लगाई। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी और केस की सुनवाई बतौर परिवाद शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद चार अगस्त 2014 को अदालत ने तीनों आरोपियों को तलब कर लिया। अदालत में चली सुनवाई में साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया गया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जुर्माने की धनराशि में से 25 हजार रुपये बतौर प्रतिकर अवधेश कुमार को दिए जाएंगे।
विज्ञापन
अश्वनी और अंकित के बीच गहरी दोस्ती थी। इसके बाद अश्वनी घर नहीं लौटा। परिजनों ने गुमशुदगी की सूचना थाने में दी। 21 जनवरी 2013 को अश्वनी का शव गांव में ही लालता प्रसाद के गन्ने के खेत में आम के पेड़ से फांसी पर लटकता मिला। गन्ने के खेत में प्लास्टिक के कुछ गिलास और शराब की बोतलें भी मिली थीं।
विज्ञापन
मृतक के पिता अवधेश ने पंचायत चुनाव की रंजिश में गांव के ही रामचंद्र व राकेश पुत्रगण होरीलाल और रामचंद्र के पुत्र कौशल किशोर उर्फ अंकित पर हत्या करने का आरोप लगाया था। थाने में तहरीर देने पर उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अवधेश ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। पांच अप्रैल 2013 को न्यायालय ने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए।
विज्ञापन
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर 26 मई 2013 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इस पर अवधेश ने न्यायालय में आपत्ति लगाई। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी और केस की सुनवाई बतौर परिवाद शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद चार अगस्त 2014 को अदालत ने तीनों आरोपियों को तलब कर लिया। अदालत में चली सुनवाई में साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया गया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जुर्माने की धनराशि में से 25 हजार रुपये बतौर प्रतिकर अवधेश कुमार को दिए जाएंगे।