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Hardoi: 34 साल पुराने मुकदमे में 5 अभियुक्तों को 3-3 साल की सजा, सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों की हो गई मौत

Thu, 20 Aug 2026 09:11 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: Shikha Pandey Updated Thu, 20 Aug 2026 09:11 PM IST
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Hardoi: Five accused sentenced to three years each in a 34-year-old case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
मझिला थाना क्षेत्र के उधरनपुर में 34 साल पहले हुई आगजनी, फायरिंग और तोड़फोड़ की घटना में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-3) अनुराग यादव ने पांच लोगों को दोषी करार दिया है। अभियुक्तों को तीन-तीन साल की सजा सुनाने के साथ ही तीन-तीन हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। मामले की सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों की मौत भी हो चुकी है।
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मझिला थाना क्षेत्र के उधरनपुर मजरा परसई निवासी ओमप्रकाश ने 16 अगस्त 1992 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।इसमें बताया था कि 15 अगस्त 1992 की रात करीब 11 बजे गांव के ही महेश, चिरौंजी, रविंद्र (तीनों सगे भाई) राम सिंह, मूला उनके पुत्र हरिपाल, जयपाल, रामपाल, पुत्तू, श्रीकृष्ण मास्टर लाठी-डंडे, फावड़ा, तमंचा और बंदूक लेकर मकान पर आ गए थे। दीवार को लेकर चल रहे विवाद में आरोपियों ने गाली गलौज किया। विरोध करने पर मकान की पक्की दीवार और मवेशियों के लिए बनी चरनी को फावड़े व लाठियों से तोड़ दिया था।
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घर के बाहर पड़े छप्पर में आग लगा दी थी। आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की थी। ओमप्रकाश के पिता रामलाल छर्रे लगने से घायल हुए थे। पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने वादी ओमप्रकाश, घायल रामलाल, चश्मदीद गवाह मौजीलाल और चिकित्सक डॉ. ए.के. जैन के बयानों को विश्वसनीय माना। सुनवाई के दौरान आरोपियों चिरौंजी, महेश, मूला, रामपाल और श्रीकृष्ण मास्टर की मौत हो गई थी। अब रविंद्र, राम सिंह, हरिपाल, पुत्तू और जयपाल को सजा सुनाई गई है।
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34 साल पुराने मुकदमे में सहानुभूति की दलील खारिज
सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने आरोपियों की उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि दोषियों के प्रति अनावश्यक सहानुभूति न्याय व्यवस्था और जनता के विश्वास के लिए नुकसानदायक हो सकती है। अपराध की प्रकृति और पीड़ित परिवार को लंबे समय तक झेलनी पड़ी परेशानी को देखते हुए दोषियों को विशेष रियायत देने का आधार नहीं है।
 
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