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कानपुर: रिवर्स शताब्दी में मिला था गहनों से भरा लावारिस बैग, जीआरपी ने चार महीने बाद महिला को सौंपा
Sun, 18 Jul 2021 12:25 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 18 Jul 2021 12:25 AM IST
सार
जीआरपी प्रभारी अजीत कुमार सिंह से मिले गहने पाकर वह भावुक हो गईं। जीआरपी प्रभारी के मुताबिक पी ब्लाक काकादेव निवासी गीता चौहान 30 मार्च को दिल्ली जाने को ट्रेन में सवार हुईं थीं।
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जीआरपी थाने में साढ़े तीन लाख रुपये के छूटे जेवरों को लेने पहुंचीं गीता चौहान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस में 30 मार्च 2021 को गहनों से भरा लावारिस बैग शनिवार को उसकी मालिकिन तक पहुंचा। जीआरपी ने उस बैग को खोजकर महिला गीता चौहान को सौंपा। इसमें करीब साढ़े तीन लाख रुपये के गहने थे।
जीआरपी प्रभारी अजीत कुमार सिंह से मिले गहने पाकर वह भावुक हो गईं। जीआरपी प्रभारी के मुताबिक पी ब्लाक काकादेव निवासी गीता चौहान 30 मार्च को दिल्ली जाने को ट्रेन में सवार हुईं थीं। उनका बैग कोच में ही छूट गया था।
जीआरपी सिपाहियों ने बैग को लावारिस दिखाकर दाखिल कर दिया था। लेकिन बैग से मिले कार्ड के आधार पर बैग मालकिन का पता चला था। शनिवार को गीता चौहान अपनी बेटी सृष्टि के साथ थाने पहुंचीं और बैग में मिले सामान को चेक कराकर उन्हें सौंप दिया गया। गीता चौहान ने बताया कि जब से जेवर खोए थे, उन्होंने एक अंगूठी तक नहीं बनवाई। उनके लिए यह बहुत बड़ी खुशी का मौका है। महिला के लिए उसके आभूषण बहुत प्रिय होते हैं।
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जीआरपी प्रभारी अजीत कुमार सिंह से मिले गहने पाकर वह भावुक हो गईं। जीआरपी प्रभारी के मुताबिक पी ब्लाक काकादेव निवासी गीता चौहान 30 मार्च को दिल्ली जाने को ट्रेन में सवार हुईं थीं। उनका बैग कोच में ही छूट गया था।
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जीआरपी सिपाहियों ने बैग को लावारिस दिखाकर दाखिल कर दिया था। लेकिन बैग से मिले कार्ड के आधार पर बैग मालकिन का पता चला था। शनिवार को गीता चौहान अपनी बेटी सृष्टि के साथ थाने पहुंचीं और बैग में मिले सामान को चेक कराकर उन्हें सौंप दिया गया। गीता चौहान ने बताया कि जब से जेवर खोए थे, उन्होंने एक अंगूठी तक नहीं बनवाई। उनके लिए यह बहुत बड़ी खुशी का मौका है। महिला के लिए उसके आभूषण बहुत प्रिय होते हैं।
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