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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Half a day's work, half the salary... the matter concerning IAS officer Rinku Singh Rahi's letter

Jalaun: आधा दिन काम, तो आधा वेतन..., आईएएस रिंकू सिंह राही के पत्र से प्रशासनिक हलकों में छिड़ी चर्चा

Sun, 19 Jul 2026 10:20 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: Shikha Pandey Updated Sun, 19 Jul 2026 10:20 PM IST
सार

प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कार्यसंस्कृति, भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर सवाल उठाए। पूरा दायित्व या दूसरे राज्य के कैडर में भेजने की मांग रखी।

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Half a day's work, half the salary... the matter concerning IAS officer Rinku Singh Rahi's letter
एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चर्चित एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही का प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को भेजा गया विस्तृत पत्र नौकरशाही में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक कार्यसंस्कृति, भ्रष्टाचार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर लिखे गए इस पत्र में उन्होंने ऐसी मांगें उठाई हैं, जिन्होंने प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सबसे अधिक चर्चा उनके उस प्रस्ताव की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि उनसे प्रतिदिन केवल आधे दिन का ही कार्य लिया जा रहा है तो वह आधे दिन का ही वेतन लेना चाहते हैं।
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रिंकू सिंह राही ने पत्र में लिखा है कि वर्तमान में एसडीएम न्यायिक के रूप में उनके पास प्रतिदिन लगभग चार घंटे का न्यायिक कार्य ही रहता है। उनका कहना है कि सरकारी धन का भुगतान वास्तविक कार्य के अनुरूप होना चाहिए। यदि पूरा दिन कार्य नहीं लिया जा रहा है तो पूरा वेतन लेना उनकी नैतिकता के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने स्वेच्छा से आधा वेतन स्वीकार करने की इच्छा जताई है।
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उन्होंने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन उन्हें अन्य आईएएस अधिकारियों की तरह पूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपता है तो वह पूरा दायित्व निभाने के लिए तैयार हैं। वहीं, यदि शासन को लगता है कि उनकी कार्यशैली प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तो नियमानुसार उनका कैडर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित कर दिया जाए।
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पत्र में रिंकू सिंह राही ने जिले में तैनाती के दौरान ग्राम पंचायतों और नगर पालिका में पारदर्शिता लाने के अपने प्रयासों का उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों, सरकारी भूमि, अवैध कब्जों और विकास कार्यों से जुड़ी सूचनाओं को सार्वजनिक करने में बाधाएं खड़ी की गईं। साथ ही शिकायतों के कथित फर्जी निस्तारण, एंटी भू-माफिया पोर्टल पर कार्रवाई, अवैध खनन और प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया है।

 

उन्होंने लिखा कि ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों को यदि लगातार हतोत्साहित किया जाएगा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। उनके अनुसार सुशासन केवल आदेश जारी करने से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी सोशल ऑडिट से ही स्थापित किया जा सकता है। हालांकि पत्र में लगाए गए आरोप और दावे स्वयं रिंकू सिंह राही के हैं। इस संबंध में प्रशासन अथवा अन्य संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
 
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