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UP: आया था दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने, रीढ़ की नस में पड़ गई थी गांठ, डॉक्टरों ने कर दिया चंगा, जानें मामला

Mon, 28 Aug 2023 09:19 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 28 Aug 2023 09:19 AM IST
सार

Banda News: डॉ. अरविंद ने बताया कि रीढ़ की मोटी नस में गांठ पड़ गई थी। इसकी वजह से दोनों पैर निष्क्रिय हो गए थे। ऑपरेशन करके गांठ निकाल दी गई है। दोनों पैर ठीक हो गए हैं।

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Had come to get Divyang certificate, there was a lump in the spinal cord, doctors healed it in Banda Medical C
ऑपरेशन के बाद मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य लाभ कर रहे प्रवासी मजदूर का हालचाल जानते डॉ. अरविंद झा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांदा जिले में दोनों पैरों से लाचार होकर दिव्यांग की जिंदगी जी रहा युवा मजदूर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने आया था। रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी दिव्यांगता खत्म कर दी। अब वह फिर से चलने-फिरने लगा है।

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यह बांदा मेडिकल कॉलेज की एक और सफलता है, जिससे युवा प्रवासी मजदूर को नई ज़िंदगी मिली है।  पड़ोसी जिले महोबा के रेवई गांव का 30 वर्षीय प्रवासी मजदूर मनोज दिल्ली में मजदूरी कर परिवार की परवरिश कर रहा था। इसी दौरान वह बीमार हो गया।
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धीरे-धीरे उसके दोनों पैर बेकार हो गए। गांव वापस आकर कई डॉक्टरों से इलाज कराया, पर सुधार नहीं हुआ।  एक साल से वह दिव्यांग हो गया। प्राइवेट अस्पतालों में महंगे इलाज की उसकी हैसियत नहीं थी। मनोज पिछले हफ्ते दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बांदा आया।

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जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह
उसने रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन डॉ. अरविंद कुमार झा से परेशानी बताई। डॉ. झा ने जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। मनोज और उसके परिजन राजी हो गए। ऑपरेशन के करीब एक हफ्ते बाद अब मनोज चलने-फिरने लगा है।

रीढ़ की नस में पड़ गई थी गांठ
डॉ. अरविंद ने बताया कि रीढ़ की मोटी नस में गांठ पड़ गई थी। इसकी वजह से दोनों पैर निष्क्रिय हो गए थे। ऑपरेशन करके गांठ निकाल दी गई है। दोनों पैर ठीक हो गए हैं। बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में यह ऑपरेशन कराने पर दो से ढाई लाख रुपये खर्च आता। प्रधानाचार्य डॉ. एसके कौशल ने डॉ. झा और उनकी टीम को शाबाशी दी है।

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