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UP: साइबर सुरक्षा कोर्स में नहीं मिला प्रवेश तो आईआईटी कानपुर-मद्रास की वेबसाइट में लगा दी सेंध, लिखा ये मैसेज
Tue, 28 Jul 2026 10:06 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:06 PM IST
सार
मैसेज लिखा कि साइट इज हैक, ऑल आई नीड इज जस्ट ए फेयर चांस। आईआईटी कानपुर अगले सत्र में दाखिला देने की तैयारी में है। साइबर से जुड़ा कोई अनुभव न होने के कारण चयन नहीं हुआ था तो यह रास्ता अपनाया।
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर से जुड़ा कोई अनुभव न होने के कारण एक छात्र को आईआईटी कानपुर के बी. साइबर सुरक्षा कोर्स में प्रवेश नहीं दिया गया। प्रवेश न पाने का मलाल छात्र को इस कदर हुआ कि उसने अपनी काबिलियत के दम पर आईआईटी कानपुर और मद्रास की वेबसाइट में ही सेंध लगा दी। इतना ही नहीं सिस्टम की कई परतों के अंदर घुसकर उसने मैसेज लिखा कि साइट इज हैक, ऑल आई नीड इज जस्ट ए फेयर चांस (साइट हैक हो चुकी है, मुझे केवल एक निष्पक्ष मौका चाहिए)। उसके इस जुनून को देखते हुए आईआईटी कानपुर अगले सत्र में उसे प्रवेश देने की तैयारी कर रहा है।
हाल ही में सीबीएसई ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल की खामियों को उजागर करने वाले छात्र को नौकरी देने वाला आईआईटी कानपुर अब एक बार फिर छात्र को प्रैक्टिकल जानकारी के आधार पर प्रवेश देने की तैयारी कर रहा है। संस्थान ने बी. साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। इसमें बिना जेईई एडवांस की रैंक के छात्रों को प्रवेश दिया गया है। छात्रों का चयन उनके कुछ पुराने कार्यों और हैकाथॉन के माध्यम से हुआ है। इस छात्र ने भी कोर्स के लिए आवेदन किया था।
छात्र का दावा है कि उसने शुल्क जमा किया, सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए और अपने साइबर सुरक्षा कार्यों का प्रमाण भी प्रस्तुत किया पर उसे शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे चयन प्रक्रिया के हैकाथॉन चरण में भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। संस्थान का दावा है कि छात्र के पास साइबर सिक्योरिटी से जुड़े पुराने अनुभव न होने के कारण उसे शाॅर्टलिस्ट नहीं किया गया। इसके बाद छात्र ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की वेबसाइट में सेंध लगा दी।
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हाल ही में सीबीएसई ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल की खामियों को उजागर करने वाले छात्र को नौकरी देने वाला आईआईटी कानपुर अब एक बार फिर छात्र को प्रैक्टिकल जानकारी के आधार पर प्रवेश देने की तैयारी कर रहा है। संस्थान ने बी. साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। इसमें बिना जेईई एडवांस की रैंक के छात्रों को प्रवेश दिया गया है। छात्रों का चयन उनके कुछ पुराने कार्यों और हैकाथॉन के माध्यम से हुआ है। इस छात्र ने भी कोर्स के लिए आवेदन किया था।
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छात्र का दावा है कि उसने शुल्क जमा किया, सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए और अपने साइबर सुरक्षा कार्यों का प्रमाण भी प्रस्तुत किया पर उसे शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे चयन प्रक्रिया के हैकाथॉन चरण में भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। संस्थान का दावा है कि छात्र के पास साइबर सिक्योरिटी से जुड़े पुराने अनुभव न होने के कारण उसे शाॅर्टलिस्ट नहीं किया गया। इसके बाद छात्र ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की वेबसाइट में सेंध लगा दी।
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छात्र का दावा है कि वह 13 वर्ष की उम्र से कोडिंग कर रहा है और पारंपरिक इंजीनियरिंग को छोड़कर इस क्षेत्र को चुना। उसने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ सीटें खाली रहने के बावजूद चयन मानदंड स्पष्ट नहीं है। वेबसाइट में सेंध लगने पर ऑनलाइन बहस भी छेड़ गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और रेडिट पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में संस्थान के पोर्टल पर लिखा मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। छात्र ने दावा किया कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार की क्षति पहुंचाना नहीं बल्कि प्रशासन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना था।
संवेदनशील डाटा तक पहुंच का दावा
वायरल स्क्रीनशॉट में यह भी दावा किया गया है कि कथित हैकर ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के सिस्टम में मौजूद कई कमजोरियों का फायदा उठाया और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई। उसने यह भी कहा कि उसने पहले ईमेल के माध्यम से इन खामियों की जानकारी प्रशासन को दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
वायरल स्क्रीनशॉट में यह भी दावा किया गया है कि कथित हैकर ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के सिस्टम में मौजूद कई कमजोरियों का फायदा उठाया और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई। उसने यह भी कहा कि उसने पहले ईमेल के माध्यम से इन खामियों की जानकारी प्रशासन को दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे आवेदक की प्रतिभा का प्रमाण मान रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे कौशल को अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर कई यूजर्स का मानना है कि बिना अनुमति किसी संस्थान के सिस्टम में घुसपैठ करना कानूनन गलत है और इसे किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे आवेदक की प्रतिभा का प्रमाण मान रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे कौशल को अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर कई यूजर्स का मानना है कि बिना अनुमति किसी संस्थान के सिस्टम में घुसपैठ करना कानूनन गलत है और इसे किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
पूर्व अनुभव न होने की वजह से छात्र को शाॅर्टलिस्ट नहीं किया गया था लेकिन हमारा काम ऐसी प्रतिभाओं को निखारना है। इस कारण छात्र को एक मौका देने की तैयारी कर रहे हैं। इस सत्र की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब अगले सत्र में वह आवेदन करेगा तो उसे मौका दिया जाएगा। - प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर