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Kanpur News: गुरुकुल प्रणाली को आधुनिक तकनीक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ा जाए
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मर्चेंट चेंबर सभाकक्ष मे आयोजित विचार गोष्ठी मे -बायेंसे- अवध बिहारी मिश्रा, संबोधित करते वक्त
- फोटो : संवाद
कानपुर। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से बुधवार को चैंबर हाल में गुरुकुल शिक्षा, प्राचीन ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और तकनीकी विकास विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने गुरुकुल प्रणाली को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने पर बल दिया।
मुख्य वक्ता, इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिक स्टडीज, गुजरात यूनिवर्सिटी के सहायक प्राध्यापक आचार्य (डॉ.) दीपक कोइराला ने कहा कि प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में न केवल ज्ञान का संचरण होता था, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिकता, अनुशासन और समग्र जीवन दृष्टि का विकास भी होता था। यदि इस प्रणाली को आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ा जाए तो भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया को एक नई दिशा दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल प्रणाली को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है। इससे एक ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जो ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और मानवता में संतुलन स्थापित कर सके। गुरुकुल में शिक्षित बच्चे नौकरी मांगने के स्थान पर स्व-रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान पूरक जीवन शैली अपनाएंगे। इससे पहले उन्होंने संस्कृत में श्लोक के साथ अपने संबोधन की शुरूआत की। इस मौके पर सुधींद्र जैन, डॉ. श्याम बाबू गुप्ता, अवध बिहारी मिश्र, मुकुल टंडन, अतुल कानोडिया, महेंद्र मोदी, अंगद सिंह, छवि जैन आदि मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता, इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिक स्टडीज, गुजरात यूनिवर्सिटी के सहायक प्राध्यापक आचार्य (डॉ.) दीपक कोइराला ने कहा कि प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में न केवल ज्ञान का संचरण होता था, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिकता, अनुशासन और समग्र जीवन दृष्टि का विकास भी होता था। यदि इस प्रणाली को आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ा जाए तो भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया को एक नई दिशा दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल प्रणाली को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है। इससे एक ऐसी पीढ़ी तैयार होगी जो ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और मानवता में संतुलन स्थापित कर सके। गुरुकुल में शिक्षित बच्चे नौकरी मांगने के स्थान पर स्व-रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान पूरक जीवन शैली अपनाएंगे। इससे पहले उन्होंने संस्कृत में श्लोक के साथ अपने संबोधन की शुरूआत की। इस मौके पर सुधींद्र जैन, डॉ. श्याम बाबू गुप्ता, अवध बिहारी मिश्र, मुकुल टंडन, अतुल कानोडिया, महेंद्र मोदी, अंगद सिंह, छवि जैन आदि मौजूद रहे।
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