UP: सब्जियों-फलों में पड़ने वाले कीटनाशक से महिलाओं के जीन-हार्मोंस प्रभावित, GSVM के शोध में सामने आई ये बात
Kanpur News: डॉ. गरिमा ने बताया कि जिन महिलाओं को शोध में शामिल किया, उनमें कई डिब्बा बंद फूड या फास्ट फूड का सेवन भी नहीं कर रही थीं। घर का बना खाना ही खा रही थीं। हेक्सा क्लोरो साइक्लोहेक्जेन नामक कीटनाशक सब्जियों, फलों, मच्छर मारने वाली दवाओं आदि में पाया जाता है।
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सब्जियों-फलों में डाले जाने वाले कीटनाशक अब रक्त तक पहुंच रहे हैं। इस वजह से गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। साथ ही उनका जीन और हार्मोंस प्रभावित होते हैं। कीटनाशक से बच्चे के पेट में ही मौत होने का खतरा और महिलाओं में स्तन, फेफड़े और बच्चेदानी के कैंसर होने का भी खतरा रहता है। यह तथ्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हुए शोध में सामने आया है। 60 गर्भवती महिलाओं को शोध में शामिल किया गया, जिनमें 50 फीसदी महिलाओं में बीपी बढ़ा हुआ मिला।
इनके खून में कीटनाशक की मात्रा अधिक मिली, जिससे बीपी बढ़ा। इससे झटके, दौरे और अंधता तक आ गई थी। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गरिमा गुप्ता ने यह शोध किया। उन्होंने बताया कि 60 महिलाओं को दो समूहों में विभाजित किया। पहले समूह में हाई बीपी वाली गर्भवतियों और दूसरे समूह में सामान्य बीपी वाली प्रसूताओं को शामिल किया गया। इनके रक्त का सैंपल लेकर जांच की तो पता चला कि हाई बीपी वाली महिलाओं में कीटनाशक का स्तर ज्यादा है।
सामान्य से अधिक था सिरम क्रेटनिन
इन महिलाओं के रक्त में अल्फा हेक्सा क्लोरो साइक्लोहेक्जेन नामक कीटनाशक पाया गया। ये कीटनाशक जीन से प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था, जो महिलाओं में ही प्रीक्लेम्पसिया की स्थिति पैदा कर रहा था, जिसमें बीपी हाई होने पर झटके, दौरे आ रहे थे। उनका लिवर और किडनी भी खराब होने की स्थिति में थी, सिरम क्रेटनिन सामान्य से अधिक था। दो से तीन महिलाओं में अंधता भी हो गई थी। शोध करने वाली टीम में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रेनू गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पाविका लाल, डॉ. आलोक, पीजी डॉ. अनंत शामिल रहे।
हार्मोनल संतुलन बिगड़ने से गर्भपात, समय से पहले प्रसव
ये कीटनाशक हार्मोंस के सामान्य कामकाज को भी प्रभावित करता है। हार्मोनल संतुलन बिगड़ने से गर्भपात, समय से पहले प्रसव और जन्म के समय बच्चे का वजन कम जैसी समस्याएं होती हैं। ये प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर डालता है और गर्भवतियां संक्रमण की चपेट में भी जल्दी आ जाती हैं। साथ ही गर्भवतियों को सिर दर्द, चक्कर आते हैं। कीटनाशक गर्भ में पल रहे बच्चे के तंत्रिका तंत्र के विकास को भी प्रभावित करता है, जिससे बच्चे में सेरेब्रल पॉल्सी, बौद्धिक अक्षमता, ऑटिज्म, सीखने की अक्षमता, अवसाद, बीपी समेत विभिन्न समस्याएं हो सकती हैं।
कुछ देर सब्जी और फल पानी में भीगा रहने दें
डॉ. गरिमा ने बताया कि जिन महिलाओं को शोध में शामिल किया, उनमें कई डिब्बा बंद फूड या फास्ट फूड का सेवन भी नहीं कर रही थीं। घर का बना खाना ही खा रही थीं। हेक्सा क्लोरो साइक्लोहेक्जेन नामक कीटनाशक सब्जियों, फलों, मच्छर मारने वाली दवाओं आदि में पाया जाता है। जब लोग इनका प्रयोग करते हैं, तो वो उनके शरीर में चला जाता है। इनसे बचने के लिए जैविक सब्जियां और फलों का सेवन करें। अगर जैविक उपलब्ध नहीं है तो सब्जियों और फलों को पानी में अच्छे से साफ करें। कुछ देर पानी में भीगा रहने दें या बेकिंग सोडा से धो दें। इससे भी कुछ हद तक कीटनाशक का असर कम हो जाता है।