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जीएसटी ः छोटे उद्योगों को नुकसान
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 23 Aug 2016 01:10 AM IST
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वाणिज्यकर कार्यालय में टैक्स बार एसोसिएशन कीहुई कार्यशाला।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। प्रस्तावित जीएसटी पर विशेषज्ञों की ओर से अलग-अलग विचार आ रहे हैं। सोमवार को वाणिज्यकर कार्यालय में टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से हुई कार्यशाला में जीएसटी को खामियों का पिटारा करार दिया गया है।
वरिष्ठ कर सलाहकार डॉ. संतोष कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार ने निर्माता व्यापारी के मामले में सेंट्रल जीएसटी की करमुक्त सीमा डेढ़ से तीन करोड़ रुपये नहीं की तो सभी छोटे उद्योग प्रभावित होंगे। विदेशी एवं मल्टीनेशनल कंपनियों से बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। छोटे उद्योगों पर कर भार बढ़ने से उनके उत्पाद महंगे हो जाएंगे। विदेशी एवं बड़ी कंपनियां यहां के लघु एवं कुटीर उद्योगों पर हावी हो जाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि जीएसटी से उद्यमियों एवं व्यापारियों को राहत कम लिखा पढ़ी अधिक होगी। सभी कामकाज मसलन पंजीयन, रिटर्न, इनपुट टैक्स क्रेेडिट, कैश क्रेडिट लेजर आदि ऑनलाइन जीएसटीएन के पोर्टल पर रखे जाएंगे। उन्होंने छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन फाइलिंग से निजात दिए जाने की भी मांग की। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने जीएसटी लागू करते समय केंद्रीय बिक्रीकर को समाप्त नहीं किए जाने को वादाखिलाफी बताया। आशंका जताई कि जीएसटी की दर बढ़ने से वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी। इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इस दौरान एडवोकेट एके दरबारी, अरुण अहूजा, एसएस निगम, पीके श्रीवास्तव, दिनेश प्रकाश, एसके श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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वरिष्ठ कर सलाहकार डॉ. संतोष कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार ने निर्माता व्यापारी के मामले में सेंट्रल जीएसटी की करमुक्त सीमा डेढ़ से तीन करोड़ रुपये नहीं की तो सभी छोटे उद्योग प्रभावित होंगे। विदेशी एवं मल्टीनेशनल कंपनियों से बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। छोटे उद्योगों पर कर भार बढ़ने से उनके उत्पाद महंगे हो जाएंगे। विदेशी एवं बड़ी कंपनियां यहां के लघु एवं कुटीर उद्योगों पर हावी हो जाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि जीएसटी से उद्यमियों एवं व्यापारियों को राहत कम लिखा पढ़ी अधिक होगी। सभी कामकाज मसलन पंजीयन, रिटर्न, इनपुट टैक्स क्रेेडिट, कैश क्रेडिट लेजर आदि ऑनलाइन जीएसटीएन के पोर्टल पर रखे जाएंगे। उन्होंने छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन फाइलिंग से निजात दिए जाने की भी मांग की। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने जीएसटी लागू करते समय केंद्रीय बिक्रीकर को समाप्त नहीं किए जाने को वादाखिलाफी बताया। आशंका जताई कि जीएसटी की दर बढ़ने से वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी। इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इस दौरान एडवोकेट एके दरबारी, अरुण अहूजा, एसएस निगम, पीके श्रीवास्तव, दिनेश प्रकाश, एसके श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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