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ग्राउंड रिपोर्ट: जिम्मेदारों की सुस्ती से सेहत की जंग में पिछड़ा इटावा

Tue, 19 Jan 2021 09:05 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 19 Jan 2021 09:05 PM IST
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Ground Report: Backward Etawah in the battle of health due to sluggishness of responsibilities
सेहत की जंग में पिछड़ा इटावा - फोटो : अमर उजाला
4681 बच्चे और 29388 गर्भवती कुपोषित। यह आंकड़ा इटावा के 55 गांवों का है, जिनमें से कुपोषण दूर करने के लिए विभाग को 90 दिन मिले। लेकिन सिस्टम ही मर्ज बन गया और पूरे 12 महीने में महज 10 गांव ही सुपोषित हो पाए।

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4681 बच्चे और 29388 गर्भवती कुपोषित। यह आंकड़ा इटावा के 55 गांवों का है, जिनमें से कुपोषण दूर करने के लिए विभाग को 90 दिन मिले। लेकिन सिस्टम ही मर्ज बन गया और पूरे 12 महीने में महज 10 गांव ही सुपोषित हो पाए।

पुष्टाहार वितरण और निगरानी सिस्टम फेल मिला। कुपोषण से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने में भी कर्मचारियों ने जद्दोजहद नहीं की, नतीजतन कुपोषण से जंग में इटावा पिछड़ा मिला। अफसरों ने जरूर कोरोना वायरस को इसकी वजह बताया, लेकिन लक्ष्य पूरा करने के तय समय तक संक्रमण ने यहां दस्तक भी नहीं दी थी।

पुष्टाहार कब बंटता पता ही नहीं
इटावा के गांव दुगावली में हालत सबसे बदतर मिले। गांव में 16 गर्भवती-धात्री, 18 बच्चे कुुपोषित मिले। एक बच्चा अतिकुपोषित था। गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी थी। आगे बढ़ तो घरों के बाहर कुछ लोग बातें करते मिले।

उनसे गांव में कुपोषण, आंगनवाड़ी केंद्र, पुष्टाहार वितरण के बारे में पूछा तो उन्होंने हालत खराब बताए। यहीं के बृजकिशोर ने बताया कि आंगनाड़ी पर कब पुष्टाहार बंटता है पता नहीं। ही बातें यहीं रहने वाले देवानंद ने बताईं। कहा कि अधिकारी भी निरीक्षण करने नहीं आते हैं।

घनी बस्ती में महिलाओं में मिली भ्रांतियां
इटावा के गांव बुलाकीपुरा में घनी बस्ती में रहने वाली महिलाओं में भ्रांतियां जोरों पर पनपती मिलीं। एक घर के बाहर चबूतरे पर बच्ची मिली, जिसका पेट निकला था, हाथ-पैर कमजोर थे। इसकी मां ममता देवी आई, तो उनसे पूछा कि इसे
क्या हुआ है, तो बताया आंगनवाड़ी केंद्र पर गए थे, कुपोषित बताकर भर्ती कराने को कहा।

लेकिन हमारे पड़ोस में एक बच्चा भर्ती हुआ था, उसे टीबी हो गई और मौत हो गई। इस भ्रांति के कारण अधिकांश महिलाओं ने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र पर ले जाना भी छोड़ दिया है। अन्य गांवों के मुकाबले बुलाकीपुरा में हालत कुछ सुधरे हुए मिले। इस गांव में 12 गर्भवती-धात्री महिलाएं कुपोषित हैं। सभी बच्चे सुपोषित बताए गए। ब्लॉक प्रभारी मधुबाला सक्सेना ने बताया कि बीते साल नौ बच्चे कुपोषित थे और 12 गर्भवती-धात्री कुपोषित थी। अब बच्चा कोई कुपोषित नहीं है। कुपोषित गर्भवती-धात्री की संख्या 12 ही बनी हुई है।
 
केस एकः
गांव दुगावली में रहने वाली 25 साल की संध्या देवी के दो बच्चे हैं। इसमें सवा दो साल का छोटा बेटा हर्ष कुपोषित है। आंगनबाड़ी केंद्र पर एक बार बच्चे को लेकर गए, बताया कि कुपोषित है। पुष्टाहार मिलने के बारे में संध्या न बताया कि लॉकडाउन से एक-दो बार ही मिला है।

केस दोः
दुगावली गांव में साढ़े छह साल की अमृता कमजोर मिली। इनके घर गए तो दादी गौरा देवी से बात हुई। उन्होंने बताया कि पोत्री कुपोषित बताई है। बेटे के तीन बच्चे हैं, गरीबी के कारण परिवार चलाना मुश्किल होता है। आंगलवाड़ी से पुष्टाहार पर इन्होंने भी वितरण सिस्टम पर अंगुली उठाई।

कोरोना का डरः 10 महीने में 30 बच्चे ही हुए भर्ती
इटावा के जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र का हाल देखा तो यहां पर लहरोई गांव की पूनम देवी अपने ढाई साल की बच्ची के साथ मिली। उन्होंने बच्ची को कुपोषित बताया। पूछा यहां भर्ती होने से पहले कुपोषण के बारे में जानती थीं, तो उन्होंने मना कर दिया। यहां की सिस्टर इंचार्ज रजनी से जानकारी मिली कि कोरोना वायरस से पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में काफी कमी आई है। 2014 से 852 कुपोषित- अति कुपोषित बच्चे भर्ती हुए थे। लेकिन महामारी में महिलाएं बच्चों को भर्ती कराने में कतराने लगीं। मार्च से 20 दिसंबर तक महज 30 बच्चे ही भर्ती हुए।

आंकड़े एक नजर
15 ः लाख आबादी
471ः ग्राम पंचायत
383ः बच्चे अति कुपोषित
4298ः बच्चे कुपोषित

कोरोना वायरस में एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने में महिलाएं कतराती हैं। अभी भी इसका असर कम नहीं हुआ है। मार्च से अब तक महज 30 बच्चे ही भर्ती हुए। इनके अभिभावकों की भी काउंसलिंग की गई। - डॉ. आलोक कुमार, प्रभारी पोषण पुर्नवास केंद्र

55 गांवों में कुपोषण दूर करने के लिए मार्च तक लक्ष्य मिला था। जनवरी में कार्य शुरू हुआ और दस गांव ही सुपोषित हो पाए। कोरोना वायरस आने से कार्य प्रभावित हुआ है। अब तेजी से लक्ष्य पूरा करने में जुट गए हैं। - सुरेश यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी इटावा

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